Sunday, March 1, 2026

LOGO

BREAKING NEWS
मध्य प्रदेश मंदसौरखून का काला कारोबार: जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में करोड़ों का घोटाला उजागर

खून का काला कारोबार: जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में करोड़ों का घोटाला उजागर

Post Media
News Logo
PeptechTime
1 मार्च 2026, 06:54 am IST
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter/XOpen Instagram
Copy Link

Advertisement

मंदसौर,ललित संकर। मध्य प्रदेश के मंदसौर जिला अस्पताल की ब्लड बैंक, जहां रोज़ मरीजों की जान बचाने के लिए रक्त उपलब्ध कराया जाता है, अब एक बड़े आर्थिक घोटाले के आरोपों में घिर गई है। जांच में सामने आया है कि अप्रैल 2016 से जनवरी 2025 के बीच ब्लड बैंक से जुड़े 35 डॉक्टरों और 26 कर्मचारियों ने “प्रोत्साहन” के नाम पर 43 लाख 91 हजार रुपये आपस में बांट लिए।


नियमों के अनुसार, निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने पर प्रति यूनिट 1050 रुपये की पूरी राशि रोगी कल्याण समिति में जमा की जानी चाहिए। लेकिन आरोप है कि यहां केवल 750 रुपये समिति में जमा किए गए, जबकि 300 रुपये प्रति यूनिट कर्मचारियों को “प्रोत्साहन” के रूप में बांटे जाते रहे।


इस लंबे समय में कुल 14 हजार 639 यूनिट रक्त की आपूर्ति की गई, जिससे 1 करोड़ 53 लाख रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हुई। इसमें से करीब 44 लाख रुपये कथित तौर पर नियम विरुद्ध तरीके से बांट दिए गए। सवाल यह है कि इतने वर्षों तक यह सिलसिला कैसे चलता रहा और किसी स्तर पर ऑडिट या आपत्ति क्यों नहीं उठी।


यदि पूरी राशि रोगी कल्याण समिति में जमा होती, तो अस्पताल की सुविधाएं बेहतर की जा सकती थीं। अतिरिक्त स्टाफ की नियुक्ति, मशीनों की मरम्मत और मरीजों को बेहतर सेवाएं देने में यह राशि उपयोगी साबित हो सकती थी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका।


मामले में प्रशासनिक स्वीकृति की प्रक्रिया भी संदेह के घेरे में है। क्या संबंधित प्रस्तावों की गहन जांच की गई थी? क्या यह सुनिश्चित किया गया था कि शासन के नियमों में “प्रोत्साहन” नाम की कोई व्यवस्था है या नहीं? यदि नहीं, तो मंजूरी किस आधार पर दी गई?


यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता का नहीं, बल्कि जनता के भरोसे से जुड़ा है। सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए आने वाला मरीज पारदर्शिता और नियमों के पालन की उम्मीद करता है। ऐसे में रक्त जैसी संवेदनशील सेवा में अनियमितता सामने आना गंभीर चिंता का विषय है।


अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या केवल राशि पर रोक लगाना पर्याप्त है, या दोषियों की जिम्मेदारी तय कर उनसे वसूली की जाएगी। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस व्यवस्था बनाई जाएगी। मंदसौर जिला अस्पताल का यह मामला प्रशासनिक सतर्कता, पारदर्शिता और जवाबदेही की कड़ी परीक्षा बन गया है।

Today In JP Cinema, Chhatarpur (M.P.)