छतरपुर (अनुभव मिश्रा)। बुंदेलखंड के युवाओं के लिए महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय (MCBU) से एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। क्षेत्र में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय में लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्यम (MSME) नवाचार सह उद्भवन (इनक्यूबेशन सेंटर) की स्थापना होने जा रही है। यह केंद्र न केवल युवाओं के नए विचारों को आकार देगा, बल्कि उन्हें सफल बिजनेस स्टार्टअप में बदलने के लिए हर संभव तकनीकी और वित्तीय मार्गदर्शन भी प्रदान करेगा।
विश्व बैंक समर्थित 'रैंप योजना' से मिली रफ्तार
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को वैश्विक संस्था वर्ल्ड बैंक (World Bank) की सहायता प्राप्त “रैंप योजना” के अंतर्गत विकसित किया जा रहा है। हाल ही में मध्य प्रदेश लघु उद्योग निगम के साथ हुए समझौते के बाद परियोजना की पहली किश्त (कुल बजट का 20 प्रतिशत) जारी कर दी गई है। इस वित्तीय सहयोग से विश्वविद्यालय परिसर में निर्माण कार्य और आवश्यक उपकरणों की खरीदी की प्रक्रिया तेज हो गई है।
80 लाख का बजट और 2500 वर्ग फीट में आधुनिक ढांचा
इस सेंटर के विकास के लिए कुल 80 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। लगभग 2500 वर्ग फीट क्षेत्र में फैलने वाला यह केंद्र पूरी तरह अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। यहाँ युवाओं के लिए:
को-वर्किंग स्पेस: साझा कार्य स्थल जहाँ विभिन्न स्टार्टअप्स एक साथ काम कर सकेंगे।
अत्याधुनिक लैब: प्रोजेक्ट्स के परीक्षण और प्रोटोटाइप तैयार करने के लिए हाई-टेक उपकरण।
डिजिटल रिसोर्सेज: हाई-स्पीड इंटरनेट और नवीनतम सॉफ्टवेयर टूल्स तक पहुँच।
प्रशिक्षण केंद्र: नियमित कार्यशालाएं और सेमिनार आयोजित करने के लिए आधुनिक मीटिंग स्पेस।
डॉ. केके गंगेले की कमान, पूरे बुंदेलखंड को मिलेगा लाभ
परियोजना के सफल संचालन के लिए डॉ. केके गंगेले को मुख्य नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। इस केंद्र की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका लाभ केवल विश्वविद्यालय के छात्र ही नहीं, बल्कि पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र के युवा और उभरते उद्यमी ले सकेंगे। यहाँ अनुभवी विशेषज्ञों और उद्योग जगत के पेशेवरों द्वारा युवाओं को बिजनेस प्लान बनाने, मार्केट रिसर्च और निवेश (फंडिंग) जुटाने के लिए विशेष मेंटरशिप दी जाएगी।
पलायन पर लगेगी रोक, बनेगा 'आत्मनिर्भर बुंदेलखंड'
बुंदेलखंड से रोजगार की तलाश में होने वाले युवाओं के पलायन को रोकने में यह इनक्यूबेशन सेंटर मील का पत्थर साबित होगा। स्थानीय स्तर पर स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिलने से न केवल नए उद्योग लगेंगे, बल्कि रोजगार के हजारों अवसर भी सृजित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के 'आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश' के विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में विश्वविद्यालय की यह पहल प्रदेश के अग्रणी केंद्रों में शुमार होने का लक्ष्य रखती है।
महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय का यह कदम क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य को बदलने वाला साबित होगा। अब बुंदेलखंड का युवा अपने विचारों को हकीकत में बदलने के लिए संसाधनों की कमी महसूस नहीं करेगा।


