छतरपुर/भोपाल,विनोद मिश्रा। मध्यप्रदेश में राज्य साइबर पुलिस ने "फर्जी सिम कार्ड" के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा चलाए जा रहे "ऑपरेशन FACE" (फेशियल ऑथेंटिकेशन कम्प्लायंस इंफोर्समेंट) के तहत जांच में सामने आया है कि प्रदेश के 28 जिलों में अब तक 36,668 फर्जी सिम जारी की गईं। इनमें ग्वालियर-चंबल संभाग में ही 11,138 सिम एक्टिव पाई गई हैं।
छतरपुर जिले में भी 856 फर्जी सिम के मामले सामने आए हैं, जहां 10 से अधिक आरोपियों के खिलाफ विभिन्न थानों में प्रकरण दर्ज किए गए हैं। पुलिस को आशंका है कि इन सिम कार्ड्स का उपयोग साइबर ठगी, ब्लैकमेलिंग और फिशिंग जैसे अपराधों में किया गया है।
एक ही फोटो से सैकड़ों सिम जारी
जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि सिम एजेंट्स ने एक ही व्यक्ति के आधार कार्ड और फोटो का इस्तेमाल कर सैकड़ों सिम कार्ड जारी कर दिए। "ऑपरेशन फेस वन" के तहत 10 यूनिक चेहरों की पहचान की गई, जिन पर 2,629 सिम जारी होना पाया गया।
ग्वालियर में कार्रवाई, एक गिरफ्तार
ग्वालियर के झांसी रोड थाना पुलिस ने इस मामले में आशीष नागर नामक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिसके पास से 7 फर्जी सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। वहीं सिम एजेंट उमेश सिंह कुशवाह फरार बताया जा रहा है। राज्य साइबर पुलिस की ग्वालियर विंग ने भी दो अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं।
सागर संभाग बना बड़ा हब
जांच में सामने आया है कि सागर संभाग फर्जी सिम कारोबार का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। गुना में 3,670, मुरैना में 2,714, दतिया में 1,950, भिंड में 2,341 और ग्वालियर में 463 फर्जी सिम बेची गई हैं।
फैक्ट फाइल: जिलावार आंकड़े
अनूपपुर (1701), बालाघाट (450), बैतूल (151), भोपाल (1651), छतरपुर (856), देवास (171), होशंगाबाद (260), इंदौर (387), जबलपुर (430), झाबुआ (179), कटनी (1307), नरसिंहपुर (1307), सिंगरौली (1958), विदिशा (1245), सागर (1204), उज्जैन (501) सहित कई जिलों में फर्जी सिम का जाल फैला हुआ है।
साइबर अपराध का बड़ा खतरा
पुलिस के अनुसार, फर्जी सिम कार्ड साइबर अपराधियों के लिए "डिजिटल हथियार" बन चुके हैं। इनका उपयोग ऑनलाइन ठगी, ओटीपी फ्रॉड, फिशिंग और ब्लैकमेलिंग जैसे मामलों में किया जा रहा है।
निष्कर्ष:
"ऑपरेशन FACE" के जरिए साइबर पुलिस लगातार इस नेटवर्क की परतें खोल रही है। आने वाले समय में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे प्रदेश में सक्रिय साइबर अपराधियों पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है।

