नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) के भीतर मचे सियासी घमासान के बीच राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को एक बहुत बड़ा झटका लगा है। पार्टी ने उन्हें उच्च सदन में 'उपनेता' के पद से हटाते हुए उनकी जगह सांसद अशोक मित्तल को नया डिप्टी लीडर नियुक्त किया है। इस कार्रवाई का सार उन कयासों और अंदरूनी खींचतान में छिपा है, जो पिछले कुछ समय से चड्ढा की पार्टी के बड़े मुद्दों पर रहस्यमयी चुप्पी और नेतृत्व से बढ़ती दूरियों की ओर इशारा कर रहे थे। राज्यसभा सचिवालय को भेजे गए पत्र में पार्टी ने यहाँ तक कह दिया है कि अब सदन में बोलने के लिए चड्ढा को समय आवंटित न किया जाए, जो उनके राजनीतिक रसूख पर एक बड़ी चोट मानी जा रही है।
राघव चड्ढा की मुश्किलें तब से शुरू हुईं जब वे फरवरी के अंत में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को आबकारी नीति मामले में मिली राहत के दौरान हुए 'शक्ति प्रदर्शन' जैसे महत्वपूर्ण मौकों पर नदारद रहे। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि चड्ढा धीरे-धीरे वरिष्ठ नेतृत्व से दूर होते गए, जिसका परिणाम यह हुआ कि पिछले हफ्ते उन्हें आगामी विधानसभा चुनावों के स्टार प्रचारकों की सूची से भी बाहर कर दिया गया। हालांकि, पार्टी ने आधिकारिक तौर पर किसी 'पार्टी-विरोधी गतिविधि' का जिक्र नहीं किया है, लेकिन रणनीतिक रूप से उन्हें किनारे करने का यह 'सही समय' पार्टी के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे रोचक मोड़ तब आया जब तीन दिन पहले राघव चड्ढा ने मुंबई एयरपोर्ट पर महाराष्ट्र की एनडीए सरकार के तहत संचालित 'उड़ान यात्री कैफे' की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ की। उन्होंने मात्र 10 रुपये में चाय पीने का अनुभव साझा करते हुए सेवा और किफायती खाने की सराहना की थी, जिसे पार्टी नेतृत्व ने उनकी बदलती राजनीतिक वफादारी के संकेत के रूप में देखा। सूत्रों की मानें तो पार्टी उन्हें औपचारिक रूप से निलंबित नहीं करेगी ताकि उन्हें 'शहीद' का दर्जा न मिल सके, बल्कि उन्हें एक साधारण सांसद के रूप में तब तक बने रहने दिया जाएगा जब तक वे खुद पद छोड़ने का फैसला न कर लें।

