उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से एक अत्यंत संवेदनशील और दुखद मामला सामने आया है, जहाँ लालगंज थाने में तैनात महिला सिपाही केसरी वर्मा की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। मृतका के पति नागेंद्र वर्मा (जो खुद भी पुलिस विभाग में सिपाही हैं) ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि उनकी पत्नी इलाज और आराम के लिए अधिकारियों के चक्कर काटती रही, लेकिन उसे छुट्टी (Medical Leave) नहीं दी गई।


सड़क हादसे से शुरू हुआ घटनाक्रम

छुट्टी बिताकर बस्ती लौटते समय प्रतापगढ़ में बाइक दुर्घटना का शिकार हो गईं, जिसमें उनके सिर पर गंभीर चोट आई और अस्पताल में 4 टांके लगे। शुरुआती इलाज के बाद उन्होंने वापस आकर बस्ती में ड्यूटी जॉइन कर ली, लेकिन सिर की चोट के कारण उन्हें लगातार तेज दर्द हो रहा था और डॉक्टरों ने आगे की जांच व आराम की सलाह दी थी।


केसरी वर्मा अपने सीटी स्कैन (CT Scan) की रिपोर्ट, डॉक्टरों के पर्चे और सिर की चोट के मेडिकल रिकॉर्ड लेकर एसपी ऑफिस पहुँचीं। पति के अनुसार, अधिकारियों के समक्ष सभी मेडिकल दस्तावेज रखने के बावजूद उन्हें न तो मेडिकल लीव दी गई और न ही अर्जित अवकाश (EL)। वे दो दिनों तक दफ्तरों के चक्कर लगाती रहीं।


अचानक बिगड़ी तबीयत और मौत

शनिवार सुबह अचानक घर पर केसरी वर्मा की हालत अत्यधिक बिगड़ गई। पति और साथी पुलिसकर्मी उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाने के लिए निकले, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। पत्नी की मौत के बाद पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर पति नागेंद्र वर्मा बिलख-बिलख कर रोते दिखे। उन्होंने मांग की है कि इलाज के लिए छुट्टी न देने वाले और लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार कर्मचारियों/अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।


प्रशासनिक रुख और जांच के बिंदु

पुलिस प्रशासन का कहना है कि मौत के सटीक कारणों का पता पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा। छुट्टी न दिए जाने और प्रक्रियात्मक लापरवाही के आरोपों की विभागीय जांच की जा रही है।


यह घटना पुलिस विभाग के भीतर कर्मचारियों के स्वास्थ्य, आपातकालीन छुट्टियों की व्यवस्था और संवेदनशील प्रशासनिक व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े करती है।