सतना, अंबिका केशरी। जिले के मझगवां वन परिक्षेत्र में बाघ के शिकार और उसके शव को जंगल में दफनाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि प्रारंभिक जांच में इस पूरे घटनाक्रम में क्षेत्र की सुरक्षा में तैनात एक स्थानीय चौकीदार के परिवार की संलिप्तता सामने आई है। वन विभाग ने मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए दफनाए गए बाघ के अवशेषों को बरामद करने के लिए खुदाई शुरू कर दी है। मामले की जांच जारी है और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।


वन विभाग के अनुसार करीब पांच-छह दिन पहले मुखबिर से सूचना मिली थी कि लगभग दो माह पूर्व जंगल में बाघ का शिकार कर उसके शव को ठिकाने लगा दिया गया था। सूचना मिलते ही विभाग ने अपना मुखबिर तंत्र सक्रिय कर गोपनीय जांच शुरू की। जांच में मिले सुरागों के आधार पर 2 जुलाई को डॉग स्क्वॉड, उड़नदस्ता दल तथा मझगवां वन परिक्षेत्र के अधिकारियों और वनकर्मियों ने पूरे क्षेत्र में सघन तलाशी अभियान चलाया। हालांकि लगातार हो रही बारिश और घने लैंटाना के जंगल के कारण शुरुआती प्रयासों में सफलता नहीं मिली।


इसी दौरान मुखबिर से यह जानकारी मिली कि क्षेत्र की सुरक्षा में तैनात एक स्थानीय चौकीदार भी पूरे मामले से जुड़ा हुआ है। इसके बाद 3 जुलाई को वन विभाग ने दो चौकीदारों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि स्थानीय चौकीदार के परिवार के एक सदस्य ने जंगली सूअर के शिकार के लिए जंगल में बिजली का तार बिछाया था। उसी तार की चपेट में आने से एक बाघ की मौत हो गई। घटना के बाद आरोपियों ने साक्ष्य मिटाने की नीयत से बाघ के शव को जंगल में गड्ढा खोदकर दफना दिया।


पूछताछ के दौरान आरोपियों ने वन विभाग को वह स्थान भी बताया, जहां शव को दफनाया गया था। इसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और खुदाई शुरू की। जमीन से बाघ के अवशेष निकाले जा रहे हैं तथा आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि अवशेषों की जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा तथा दोषियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।