वाराणसी। गंगा का जलस्तर बढ़ने से वाराणसी में बाढ़ से कई घाटों के बीच आवाजाही बाधित हो गई है। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भी आवाजाही प्रभावित हुई है, साथ ही सुरक्षा के उपाय भी बढ़ा दिए गए हैं। आईएएनएस से बातचीत करते हुए पंडित विवेकानंद पांडे ने कहा, "गंगा का जलस्तर बढ़ने से हमें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पहले, जब जलस्तर कम था, तो हम मंदिरों में रुद्राभिषेक और पूजा-अर्चना कर पाते थे। अब, जलस्तर बढ़ने के कारण रुद्राभिषेक करना मुश्किल हो गया है। सावन का महीना होने के कारण भक्तों को भी परेशानी होगी क्योंकि घाटों के बीच आने-जाने का रास्ता बाधित हो रहा है, और हमें शायद रास्ते में पड़ने वाले छोटे शिवलिंगों पर पूजा-अर्चना करनी पड़ सकती है।"


उन्होंने बताया कि गंगा का जलस्तर इस तरह से बढ़ रहा है कि हर घंटे हम लोगों को चौकियों को ऊपर ले जाना पड़ रहा है। कल से 20-25 फीट पानी बढ़ चुका है। नाविकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नाव का संचालन धीरे-धीरे बंद हो रहा है। वहीं, दूसरे किनारे नाव का संचालन बंद हो गया है।


इस वक्त गंगा उफान पर हैं। फर्रुखाबाद में भी बाढ़ से कई गांवों में संकट पैदा हो गया है। सरकार की ओर से लोगों को राहत सामग्री बांटी जा रही है। राहत सामग्री लेकर घर जा रहे तौसीम ने बताया कि सड़कें भी डूब गई हैं। एक और शख्स ने कहा कि गांव डूब गए हैं। अभी पता नहीं कितना पानी और बढ़ेगा। आस-पास के इलाकों में काफी कटान हो रहा है। पांच किलोमीटर पैदल चलने पर गाड़ियां मिलती हैं।


जिलाधिकारी अंकुर लाठर ने आईएएनएस से बताया था कि गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से ऊपर है। 33 गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया। एक गांव में पानी आ गया है; इस गांव के 300 लोगों को शरणार्थी कैंप में लाया गया है। शरणालय में पशुओं के लिए व्यवस्था की गई है।