गुवाहाटी। असम सरकार के मंत्री और असम गण परिषद (एजीपी) के अध्यक्ष अतुल बोरा ने बुधवार को कहा कि भाषा के नाम पर किसी भी व्यक्ति को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अवैध विदेशी, कानून के अनुसार विदेशी ही माने जाएंगे।

असम विधानसभा के बजट सत्र के दौरान पत्रकारों से बातचीत में अतुल बोरा ने असमिया भाषा और अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर राज्य सरकार का पक्ष स्पष्ट करने की कोशिश की।

उन्होंने कहा कि भाषा के नाम पर लोगों को परेशान किए जाने के आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। असम में रहने वाला कोई भी व्यक्ति असमिया भाषा बोल सकता है और किसी को भी असमिया बोलने से नहीं रोका गया है।

अतुल बोरा ने कहा, "यह आरोप पूरी तरह गलत है कि भाषा के नाम पर लोगों को परेशान किया जा रहा है। असम में रहने वाला कोई भी व्यक्ति असमिया बोल सकता है। किसी भी व्यक्ति के लिए असमिया बोलना प्रतिबंधित नहीं है।"

मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लगातार असमिया भाषा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार को बढ़ावा दे रही है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि भाषा के मुद्दे का इस्तेमाल समुदायों के बीच अनावश्यक विभाजन पैदा करने के लिए न हो।

अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर अतुल बोरा ने दोहराया कि कोई व्यक्ति कौन सी भाषा बोलता है, इससे उसके कानूनी दर्जे पर कोई फर्क नहीं पड़ता।

उन्होंने कहा, "विदेशी, विदेशी ही होते हैं। इस मामले में मेरे मन में कोई भ्रम नहीं है।" उन्होंने कहा कि अवैध प्रवासियों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई कानून के अनुसार ही की जानी चाहिए।

एजीपी नेता का यह बयान ऐसे समय आया है, जब असम में भाषाई पहचान और कथित बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान को लेकर राजनीतिक बहस तेज है।

राज्य सरकार ने हाल के दिनों में घुसपैठ के खिलाफ अभियान तेज किया है। सरकार का कहना है कि सत्यापन प्रक्रिया से वास्तविक भारतीय नागरिकों को डरने की जरूरत नहीं है।

सरकार लगातार यह भी कहती रही है कि असमिया भाषा सीखने और बोलने को राज्य की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा मानते हुए प्रोत्साहित किया जाता है, जबकि अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई संविधान और मौजूदा कानूनों के तहत अलग से की जा रही है।