सीधी। मध्य प्रदेश के सीधी जिले में शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। सिहावल जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम डिहुली नंबर-4 स्थित प्राथमिक विद्यालय में पदस्थ शिक्षक दिनेश प्रसाद कोल पर शराब के नशे में धुत होकर स्कूल आने और परिसर में ही शराब का सेवन करने के गंभीर आरोप लगे हैं। घटना से जुड़ा एक वीडियो सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है।

जिला मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित इस विद्यालय की पड़ताल के दौरान शिक्षक दिनेश प्रसाद कोल स्कूल के एक कमरे में लेटे हुए पाए गए। शुरुआत में उन्होंने शराब पीने से इनकार करते हुए ब्लड प्रेशर (बीपी) बढ़ने का दावा किया, लेकिन थोड़ी ही देर बाद वे लड़खड़ाते हुए ब्लैकबोर्ड के पास पहुँचे और जिला कलेक्टर विकास मिश्रा का नाम गलत लिखकर "मनीष मिश्रा" दर्ज कर दिया।


कक्षा में गिर पड़ते हैं और उल्टी कर देते हैं शिक्षक

स्कूल के छोटे-छोटे विद्यार्थियों ने बताया कि शिक्षक अक्सर शराब पीकर ही कक्षा में आते हैं। कई बार वे नशे की हालत में ब्लैकबोर्ड या बच्चों के ऊपर ही गिर पड़ते हैं और कक्षा के अंदर ही उल्टी कर देते हैं। बच्चों ने बताया कि शिक्षक के इस रवैये और असुरक्षित माहौल के कारण कई अभिभावकों ने अपने बच्चों का दाखिला दूसरे स्कूलों में करा दिया है या उन्हें स्कूल भेजना ही बंद कर दिया है।


महीने में 2 से 3 दिन उपस्थिति, फिर भी मिलता रहा पूरा वेतन

विद्यालय के दूसरे शिक्षक अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि वे पिछले दो वर्षों से यह स्थिति देख रहे हैं। उनके अनुसार दिनेश प्रसाद कोल महीने में बमुश्किल दो-तीन दिन ही स्कूल आते हैं और अधिकतर समय नशे में रहते हैं। इस संबंध में कई बार संकुल प्राचार्य और बीआरसीसी (BRCC) कार्यालय में लिखित शिकायतें और उपस्थिति पंजी का रिकॉर्ड भेजा गया, लेकिन कोई प्रशासनिक कदम नहीं उठाया गया। शिक्षक शर्मा ने आरोप लगाया कि उपस्थिति बेहद कम होने के बावजूद संकुल स्तर से उन्हें हर महीने पूरा वेतन जारी किया जाता रहा। इसी अव्यवस्था का नतीजा है कि जिस स्कूल में पहले करीब 200 बच्चे पढ़ते थे, वहाँ अब छात्रों की संख्या घटकर महज 28 रह गई है।


मानसिक रोग विशेषज्ञ ने किया खंडन

मामले में जब आरोपी शिक्षक दिनेश प्रसाद कोल से बात की गई तो उन्होंने माना कि वे कभी-कभार शराब पीते हैं और स्कूल में भी शराब की बोतल लेकर आते हैं। उन्होंने दावा किया कि वे बीपी के मरीज हैं और एक डॉक्टर की डॉक्टरी सलाह पर ही शराब का सेवन करते हैं। हालांकि, जब इस संबंध में जिले की मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. संगीता जैन से संपर्क किया गया तो उन्होंने शिक्षक के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। डॉ. जैन ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी किसी मरीज को शराब पीने की सलाह नहीं दी है। वे अपने क्लिनिक में पान-गुटखा खाकर आने वाले लोगों को भी प्रवेश नहीं देती हैं, ऐसे में शराब पीने की सलाह देने का सवाल ही नहीं उठता।


प्रशासनिक अधिकारियों ने दी जांच की बात

संकुल प्राचार्य सुरेश प्रसाद कोल ने स्वीकार किया कि उन्हें शिक्षक के आचरण की जानकारी थी और उन्हें कई बार समझाया भी गया था, लेकिन सुधार नहीं हुआ। वहीं, सहायक आयुक्त (ACS) दिवाकर प्रसाद शुक्ला ने स्पष्ट किया कि शिक्षक का वेतन संकुल से भेजी गई उपस्थिति रिपोर्ट के आधार पर जारी होता है। शुरुआती जांच में शिक्षक के केवल चार दिन स्कूल आने के प्रमाण मिले हैं, जबकि संकुल द्वारा पूरी उपस्थिति भेजी गई थी। अधिकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।