नई दिल्ली। नई तकनीकें तरक्की के नए मौके तो बनाती हैं, लेकिन इनोवेशन को सुलभ, किफायती, भरोसेमंद और टिकाऊ बनाए रखने के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत होती है। यह बातें केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को 14वीं ब्रिक्स विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (एसटीआई) मंत्रिस्तरीय बैठक में कही। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, डॉ. सिंह ने ब्रिक्स सहयोगियों से कहा कि वे अत्याधुनिक रिसर्च, इनोवेशन के लिए फंडिंग, टैलेंट की आवाजाही, रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर साझा करने, स्टार्टअप पार्टनरशिप और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में गहरे सहयोग के लिए व्यावहारिक रास्ते अपनाएं।
उन्होंने कहा कि इस तरह का सहयोग एक ऐसा भविष्य-उन्मुख ब्रिक्स एसटीआई (साइंस, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन) ढांचा बनाने में मदद कर सकता है जो वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो और 'ग्लोबल साउथ' की आकांक्षाओं का समर्थन करे।
मंत्री ने कहा कि दुनिया में तेजी से बदलाव हो रहे हैं, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मटीरियल्स, बायोटेक्नोलॉजी, फोटोनिक्स, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग जैसी उभरती हुई टेक्नोलॉजी से प्रेरित हैं।
मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में साइंस, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक पहुंच के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि भारत साइंस और इनोवेशन के प्रति एक खुले, समावेशी और मानव-केंद्रित दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भारत की उन पहलों का जिक्र किया, जिनमें नेशनल क्वांटम मिशन, नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन, बॉयोई3 पॉलिसी, नेशनल जियोस्पेशियल पॉलिसी और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का बढ़ता इकोसिस्टम शामिल हैं। ये पहलें ऐसे दृष्टिकोण को दर्शाती हैं, जिसमें इनोवेशन लोगों के जीवन को बेहतर बनाता है और टिकाऊ आर्थिक बदलाव में मदद करता है।
ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत करते हुए, डॉ. सिंह ने कहा कि भारत ने 2026 में अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए 'लचीलेपन, इनोवेशन, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' को थीम के तौर पर चुना है।
यह थीम इस साझा विश्वास को दर्शाती है कि साइंस, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को लचीलापन बढ़ाकर, समावेशी विकास को गति देकर, टिकाऊ विकास को बढ़ावा देकर और देशों के बीच समान साझेदारी को प्रोत्साहित करके मानवता की सेवा करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अपनी विशाल आबादी, वैज्ञानिक प्रतिभा और बढ़ती रिसर्च क्षमताओं के साथ, ब्रिक्स एक सहयोगी, जिम्मेदार और भविष्य-उन्मुख इनोवेशन इकोसिस्टम को बढ़ावा देने की अच्छी स्थिति में है।
डॉ. सिंह ने बातचीत जारी रखने और उसे व्यावहारिक सहयोग व ठोस नतीजों में बदलने में एसटीआई स्टीयरिंग कमेटी, वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न एसटीआई वर्किंग ग्रुप्स के योगदान को भी सराहा।
मंत्री ने कहा कि ब्रिक्स एसटीआई सहयोग एक मजबूत मंच के रूप में विकसित हुआ है, जिसमें रिसर्च सहयोग, इनोवेशन पार्टनरशिप, युवा वैज्ञानिकों का आदान-प्रदान, रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर और विषय-आधारित वर्किंग ग्रुप्स शामिल हैं।
भारत की अध्यक्षता के दौरान, ब्रिक्स एसटीआई प्राथमिकताओं की व्यापक समीक्षा की गई ताकि सहयोग को उभरते वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्रों और समाजों की विकासात्मक आकांक्षाओं के अनुरूप बनाया जा सके।




