छतरपुर, विनोद मिश्रा। जिले के सटई निवासी 20 वर्षीय सुमन कुशवाहा को रात में जहरीले सर्प ने डस लिया। परिजनों ने तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय पहले झाड़फूंक का सहारा लिया। हालत गंभीर होने पर जब महिला की अंतिम सांसें चल रही थीं ऐसा डॉक्टर रवि सोनी का कहना है, तब उसे छतरपुर जिला अस्पताल लाया गया।
जिला अस्पताल में डॉक्टर रवि सोनी ने प्राथमिक उपचार के बाद महिला को अस्पताल की चौथी मंजिल पर भर्ती किया। हालांकि अस्पताल नर्स स्टाफ इंचार्ज गीता चौरसिया के अनुसार महिला को मृत अवस्था में ही अस्पताल लाया गया था। उपचार के दौरान महिला की मौत की पुष्टि होने के बाद परिजन बिना डॉक्टर या अस्पताल प्रबंधन को सूचना दिए स्ट्रेचर पर शव रखकर अस्पताल से बाहर ले गए और झाड़फूंक कराने के लिए चले गए।
मामले की जानकारी मीडिया को मिलने के बाद जब अस्पताल में पड़ताल की गई तो चौथी मंजिल की इंचार्ज गीता चौरसिया ने बताया कि इमरजेंसी में सूचना दी गई थी,लेकिन डॉक्टर का कहना कि सूचना बाद में मिली जब डेडबॉडी जिला अस्पताल से परिजन डॉक्टर को बिना जानकारी दिए शव लेकर चले गए। वहीं जिला अस्पताल परिसर में मौजूद पुलिस चौकी को भी शव ले जाने की जानकारी तत्काल नहीं थी।
चौकी में मौजूद मुंशी रजिया के अनुसार, पोस्टमार्टम के लिए पुलिस को अस्पताल की ओर से सूचना मिलना आवश्यक होता है। बिना सूचना शव ले जाने की स्थिति में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर सर्पदंश के बाद समय पर इलाज कराने के बजाय परिजनों द्वारा झाड़फूंक का सहारा लेने से महिला की जान बचाने का मौका गंवाने की बात सामने आ रही है, वहीं दूसरी ओर मौत के बाद अस्पताल से बिना सूचना शव ले जाना भी गंभीर मामला है।
अब सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या अस्पताल प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था में कमी थी या परिजनों ने जानबूझकर बिना सूचना शव को अस्पताल से बाहर ले जाया? साथ ही, जिले में लगातार सामने आ रहे सर्पदंश के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचने और झाड़फूंक के बजाय तत्काल चिकित्सकीय उपचार लेने के लिए जागरूक करने की जरूरत है। डॉ रवि सोनी ने कहा कि किसी कीड़े के काटने या सर्व धांश के मामले में परिवार के लोग लापरवाही करते हैं और डॉक्टर को इलाज करने की वजह झारखंड का सहारा लेते हैं जिससे पीड़ित मरीज को जान गंवानी पड़ती है पहले डॉक्टर से इलाज करने से जान बच सकती है वह सही समय पर सही इलाज भी मिल सकता है। जिला अस्पताल में मौजूद चौकी में सूचना जब दी गई जब डेड बॉडी जिला अस्पताल से गायब हो गई और उसे समय हड़कंप मच गया इमरजेंसी में मौजूद स्टाफ के द्वारा परिजनों को सूचना दी गई की डेड बॉडी का पोस्टमार्टम कारण और बिना सूचना दिए डेड बॉडी कैसे ले गए इस पर पुलिस चौकी इंचार्ज ने डॉक्टर एवं नर्सिंग स्टाफ के द्वारा दिए गए मृत की सूचना को लेने से इनकार किया कहा जब डेड बॉडी जिला अस्पताल से चली गई इसके बाद सूचना दी जा रही कि पोस्टमार्टम कराया जाए। जब जिला अस्पताल में हड़कंप मजा तो मृत महिला के परिजनों को फोन लगाया गया और पोस्टमार्टम के लिए कहा कि बिना सूचना दिए डेड बॉडी को जिला अस्पताल से कैसे ले गए।




