श्योपुर,उत्तम सिंह। श्योपुर जिले में रविवार को कुदरत का कहर टूट पड़ा। जिले के विभिन्न इलाकों में हुई भीषण ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी और कटी हुई गेहूं की फसल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया। देखते ही देखते खेत सफेद ओलों की चादर से ढक गए, गेहूं की बालियां टूट गईं, दाने झड़ गए और किसानों की मेहनत मिट्टी में मिल गई। अन्नदाता अब आंसू पोछते नजर आ रहे हैं।


इस प्राकृतिक आपदा में फसल की भारी क्षति को देखते हुए सियासत भी सक्रिय हो गई है। कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के नेताओं ने किसानों के साथ खड़े होने का भरोसा दिलाया है।


कांग्रेस विधायक बाबू जडेल ने वीडियो संदेश जारी कर किसानों को आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, “किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। मैंने पहले भी आपके हक की लड़ाई लड़ी है और मुआवजा दिलवाया है। इस बार भी भारी नुकसान को लेकर मैं मजबूती से लड़ाई लड़ूंगा और सुनिश्चित करूंगा कि हर प्रभावित किसान को उचित मुआवजा मिले।”


भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष सुरेंद्र जाट ने भी वीडियो जारी कर चिंता जताई। उन्होंने कहा, “फसलें बुरी तरह तबाह हुई हैं। यह किसानों के लिए बहुत कठिन समय है। हम संकट की इस घड़ी में पूरी तरह किसानों के साथ खड़े हैं। शासन-प्रशासन से चर्चा की जाएगी ताकि जल्द से जल्द सर्वे शुरू हो और राहत राशि प्रदान की जा सके।”


किसान संगठनों ने भी तुरंत कार्रवाई की मांग की है। भारतीय किसान यूनियन चढूनी के प्रदेश अध्यक्ष राधेश्याम मीणा ने बताया कि सोमवार को दोपहर 12 बजे श्योपुर मुख्यालय के पटेल चौक पर कलेक्ट्रेट के सामने पीड़ित किसानों के साथ बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने हाइवे पर बैठे किसानों की मांगों को भी दोहराया कि ओलावृष्टि से हुई फसल क्षति का तत्काल सर्वे कर उचित मुआवजा दिया जाए और बिजली बिल माफी भी की जाए। अन्य किसान संगठन भी लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं।


किसानों का कहना है कि यह सिर्फ फसल का नुकसान नहीं, बल्कि पूरे साल की मेहनत और परिवार के भविष्य की बर्बादी है। अब जिला प्रशासन पर नजर है कि वह कितनी जल्दी पटवारी और कृषि विभाग की टीम भेजकर नुकसान का सर्वे शुरू करता है और प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाता है।