मुंबई। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए नियमों में बड़ा बदलाव किया है। इसके तहत विदेशी निवेशकों और विदेशी वेंचर कैपिटल निवेशकों (एफवीसीआई) के लिए पंजीकरण फीस ढांचे में अब डॉलर की जगह रुपए का उपयोग किया जाएगा। यह नया बदलाव करीब छह महीने बाद लागू होगा, जिससे नए सिस्टम की तरफ जाने के लिए विदेशी निवेशकों को पर्याप्त समय मिले।

सेबी की ओर से जारी एक नोटिफिकेशन के अनुसार, अब मौजूदा 1,000 डॉलर की फीस को बदलकर उसके बराबर की भारतीय मुद्रा में 90,000 रुपए कर दिया गया है।

कैटेगरी-I एफपीआई और एफवीसीआई के लिए रजिस्ट्रेशन फीस को भी 2,500 डॉलर से बदलकर 2.3 लाख रुपए कर दिया गया है। बाजार नियामक ने इसी तरह लेट फीस और कंटिन्यूएशन फीस में भी बदलाव किया है।

संशोधित नियमों के तहत, डिपॉजिटरी को एफपीआई और एफवीसीआई से इकट्ठा की गई फीस, रजिस्ट्रेशन मिलने के पांच वर्किंग दिनों के अंदर सेबी को जमा करनी होगी।

इसके अलावा, नियामक ने एफपीआई रजिस्ट्रेशन के लिए कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म में जन्म की तारीख या कंपनी के बनने की तारीख को शामिल करके रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को आसान बना दिया है।

यह बदलाव मार्च में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, परमानेंट अकाउंट नंबर (पेन) के लिए आवेदन की प्रक्रिया को आसान बनाने के मकसद से किया गया है।

सेबी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान एफपीआई और एफवीसीआई से रजिस्ट्रेशन, कंटिन्यूएशन और दूसरी फीस के तौर पर जीएसटी सहित 12.98 मिलियन डॉलर जमा किए।

नियामक ने कहा कि रुपए में फीस तय करने के सिस्टम से डॉलर आधारित मौजूदा सिस्टम में आने वाली ऑपरेशनल दिक्कतें दूर होंगी। इन दिक्कतों में मैनुअल अकाउंटिंग और इनवॉइसिंग, रियल-टाइम अकाउंटिंग की जानकारी न मिल पाना और फाइनेंशियल रिपोर्टिंग में देरी शामिल हैं।

इसके अलावा, नियामक ने कस्टोडियन के लिए फीस पेमेंट के तरीके में भी बदलाव किया है। अब उन्हें सालाना 10 लाख रुपए के बजाय हर महीने 85,000 रुपए देने होंगे।