सतना, अंबिका केशरी। कृषि विस्तार अधिकारियों ने 'सार्थक ऐप' के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने की अनिवार्यता का विरोध करते हुए मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर सतना को ज्ञापन सौंपा। अधिकारियों का कहना है कि उनका कार्य पूरी तरह मैदानी स्तर पर किसानों के बीच रहकर होता है, इसलिए ऐप आधारित उपस्थिति व्यवस्था व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है और कृषि विस्तार अधिकारी सरकार की योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन ऑनलाइन उपस्थिति की बाध्यता से उनके कार्य प्रभावित हो रहे हैं।


ज्ञापन में अधिकारियों ने बताया कि विभाग में बड़ी संख्या में महिला कृषि विस्तार अधिकारी कार्यरत हैं, जबकि अधिकांश केंद्रों पर शासकीय आवास और मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। एक-एक अधिकारी के पास दो से छह केंद्रों का प्रभार है, जिसके अंतर्गत 40 से 50 गांवों की जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। इसके अलावा उन्हें कृषि विभाग के साथ सोयाबीन भावांतर योजना, समर्थन मूल्य पर खरीदी, खाद वितरण, बीएलओ ड्यूटी तथा एसआईआर सर्वे जैसे कई अतिरिक्त कार्य भी करने पड़ते हैं।


अधिकारियों ने कहा कि किसानों की सुविधा और उपलब्धता के अनुसार उन्हें सुबह से देर रात तक गांवों और खेतों में रहना पड़ता है। कई बार देर रात तक ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य करना पड़ता है, जिससे विशेष रूप से महिला अधिकारियों के लिए समय पर ऐप से उपस्थिति दर्ज करना और सुरक्षित आवागमन करना कठिन हो जाता है। उनका कहना है कि कृषि विस्तार अधिकारियों के निरंतर प्रयासों के कारण ही मध्य प्रदेश लगातार कृषि उत्पादन में अग्रणी रहा है और कई बार कृषि कर्मण अवार्ड प्राप्त कर चुका है।


कृषि विस्तार अधिकारियों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि उनकी कार्यप्रणाली की प्रकृति और व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए उन्हें 'सार्थक ऐप' के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने की अनिवार्यता से पूरी तरह मुक्त किया जाए, ताकि वे बिना प्रशासनिक बाधाओं के किसानों के बीच रहकर अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें।