आयुष शुक्ला, नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत द्वारा हाल ही में 2,000 से अधिक Gen Z और Gen Alpha युवाओं के साथ संवाद के दौरान दिए गए बयान इस समय देश के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। संघ प्रमुख का यह कहना कि "प्रदर्शन लोकतंत्र में संवाद का एक माध्यम है" और "विरोध करने वाले युवाओं को केवल इस आधार पर राष्ट्रविरोधी नहीं ठहराया जाना चाहिए", संघ की परंपरागत कार्यशैली में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।


1. रणनीति में बदलाव के मुख्य कारण

Gen Z डिजिटल माध्यमों, सोशल मीडिया और तार्किक प्रश्नों के आधार पर अपनी राय तय करती है। पारंपरिक नारों या एकतरफा संवाद के बजाय यह वर्ग पारदर्शिता और सीधे संवाद को प्राथमिकता देता है। आगामी चुनावों में करोड़ों पहली बार मतदान करने वाले युवा भाग लेंगे। भारत की जनसांख्यिकी को देखते हुए यह वर्ग किसी भी सामाजिक या राजनीतिक आंदोलन की दिशा तय करने में सक्षम है। विभिन्न मुद्दों पर सड़क पर उतरने वाले युवाओं को 'विरोधी' मानने के बजाय उन्हें भागीदार बनाने की दिशा में संघ अपनी संवाद शैली (Communication Strategy) को नया रूप दे रहा है।


2. वैचारिक निरंतरता बनाम संवाद शैली

विश्लेषकों के अनुसार, RSS ने अपने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के मूल सिद्धांतों में बदलाव नहीं किया है। हालांकि, अपनी बात पहुँचाने के तरीके (Messaging) को नई पीढ़ी की भाषा और मानसिकता के अनुकूल ढला है: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के दृष्टिकोण में पारंपरिक कार्यशैली की तुलना में वर्तमान 'Gen Z' रणनीति के तहत स्पष्ट बदलाव देखने को मिल रहा है। जहाँ संघ का मुख्य जोर पहले केवल अनुशासन और संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर रहता था, वहीं अब नई रणनीति के तहत सीधा संवाद, सहभागिता और विचार-विमर्श पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।


युवा आंदोलनों पर रुख की बात करें तो पहले जहां सख्त अनुशासन और असहमति से परहेज करने की नीति अपनाई जाती थी, वहीं वर्तमान दृष्टिकोण में असहमति को लोकतंत्र का एक स्वाभाविक और महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। इसके अलावा, विचारों के प्रसार के माध्यम में भी बदलाव आया है; पारंपरिक रूप से जहाँ केवल दैनिक शाखाओं और व्यक्तिगत संपर्क पर जोर दिया जाता था, वहीं अब नई पीढ़ी तक पहुँचने के लिए डिजिटल मंचों, युवा संवाद कार्यक्रमों और सोशल मीडिया का व्यापक रूप से उपयोग किया जा रहा है।


3. राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

कांग्रेस, भाजपा, आम आदमी पार्टी और क्षेत्रीय दलों सहित सभी राजनीतिक संगठन डिजिटल अभियानों और संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से Gen Z तक पहुँच बना रहे हैं। संघ नई पीढ़ी को एक विरोधी वर्ग के रूप में देखने के बजाय उन्हें भविष्य के निर्माण में सहभागी के रूप में जोड़ने का प्रयास कर रहा है। मोहन भागवत का यह कदम यह दर्शाता है कि दीर्घकालिक अस्तित्व और प्रभाव के लिए सामाजिक व वैचारिक संगठनों को नई पीढ़ी की आकांक्षाओं, प्रश्नों और भाषा को अपनाना अनिवार्य हो गया है।