नई दिल्ली। देश के क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) ने वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक का सर्वश्रेष्ठ वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। वित्तीय सेवा विभाग की समीक्षा बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, आरआरबी का शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) बढ़कर 10,176 करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में 6,820 करोड़ रुपए था।बयान में कहा गया है कि आरआरबी की परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। बैंकों का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (जीएनपीए) अनुपात घटकर रिकॉर्ड निचले स्तर 5.3 प्रतिशत पर आ गया है, जबकि शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनएनपीए) अनुपात भी घटकर 2.1 प्रतिशत रह गया है। इससे क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की वित्तीय स्थिति पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है।

आधिकारिक बयान के मुताबिक, देश के सभी 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का कुल कारोबार 13.5 लाख करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर गया है। यह उपलब्धि ग्रामीण बैंकिंग क्षेत्र में लगातार बढ़ते विश्वास और वित्तीय गतिविधियों को दर्शाती है।

आरआरबी के प्रदर्शन की समीक्षा के लिए आयोजित बैठक की अध्यक्षता वित्तीय सेवा विभाग के सचिव ने की। बैठक में नाबार्ड के अध्यक्ष, सभी 28 आरआरबी के अध्यक्ष, वित्तीय सेवा विभाग, प्रायोजक बैंकों, भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) के अधिकारी शामिल हुए।

बैठक में बताया गया कि वर्तमान समय में 28 आरआरबी 26 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में 22,273 शाखाओं के माध्यम से सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। इनकी पहुंच देश के लगभग 700 जिलों तक है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं के विस्तार में इन बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका बनी हुई है।

आरआरबी के ऋण-जमा अनुपात में भी लगातार सुधार देखने को मिला है, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 75.2 प्रतिशत के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। यह दर्शाता है कि बैंक अधिक प्रभावी ढंग से जमा राशि को ऋण के रूप में वितरित कर रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रहे हैं।

बयान के अनुसार, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक प्राथमिकता क्षेत्र ऋण वितरण से जुड़े सभी लक्ष्यों और उप-लक्ष्यों को लगातार हासिल कर रहे हैं। इससे समाज के कमजोर, वंचित और कम बैंकिंग सुविधा वाले वर्गों तक औपचारिक वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ी है।

वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में भी आरआरबी ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान इन बैंकों ने प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत 54.98 लाख से अधिक नए खाते खोले हैं, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने में मदद मिली है।

वित्तीय सेवा विभाग के सचिव ने समीक्षा बैठक में कहा कि ग्रामीण बैंकों को आधुनिक बैंकिंग तकनीक और डिजिटल सेवाओं को तेजी से अपनाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि डिजिटल बैंकिंग की सुविधाएं ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंचनी चाहिए ताकि अधिक से अधिक लोग औपचारिक बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठा सकें।

उन्होंने वित्त वर्ष 2025-26 में आरआरबी के बेहतर प्रदर्शन की सराहना करते हुए सभी बैंकों से इस गति को बनाए रखने और आगे प्रदर्शन सुधारने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने प्रायोजक बैंकों से आग्रह किया कि वे क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी अवसंरचना मजबूत करने में सहयोग दें।

सचिव ने सभी आरआरबी अध्यक्षों को अपने-अपने क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुसार ऋण वितरण बढ़ाने और जहां संभव हो, वहां नए एवं नवाचारी ऋण उत्पाद विकसित करने के लिए भी प्रोत्साहित किया।