नई दिल्ली। राम मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी के विवाद के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बुधवार को अयोध्या में एक अहम बैठक करने जा रहा है। इस बैठक में प्रशासनिक सुधारों पर चर्चा होगी, जिसमें राम मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति और ट्रस्ट में खाली पड़े तीन पदों को भरने जैसे मुद्दे शामिल हैं। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि सीईओ की नियुक्ति पर अंतिम फैसला होने की संभावना कम है, क्योंकि आवेदकों की स्क्रीनिंग की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।सूत्रों के मुताबिक, सीईओ पद के लिए उम्मीदवारों की सिफारिश करने के लिए बनाई गई तीन सदस्यों वाली एक्सपर्ट कमेटी को बहुत सारे आवेदन मिले हैं, जिससे तय समय में स्क्रीनिंग प्रोसेस पूरा करना मुश्किल हो गया है।

इस वजह से कमेटी के ट्रस्ट की बैठक से पहले तीन उम्मीदवारों की फाइनल शॉर्टलिस्ट सौंपने की संभावना कम है, जिससे मंदिर के पहले प्रोफेशनल सीईओ के चयन में देरी होगी।

सीईओ का पद बनाने का फैसला ट्रस्ट की 6 जुलाई की बैठक में लिया गया था, जो मंदिर के चढ़ावे में चोरी के आरोपों के बाद हुआ था। तब ट्रस्ट ने मंदिर के मैनेजमेंट को मजबूत करने, फाइनेंशियल पारदर्शिता लाने, सुरक्षा इंतजाम बेहतर करने और भक्तों के लिए सुविधाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए एक प्रोफेशनल एडमिनिस्ट्रेटिव स्ट्रक्चर लाने का फैसला किया था।

नियुक्ति के बाद सीईओ मंदिर के रोजाना के कामकाज, मैनेजमेंट के फैसलों को लागू करने और स्टाफ की देखरेख के लिए जिम्मेदार होंगे। ट्रस्ट की मंजूरी से सीईओ को मंदिर के कामकाज के लिए सेक्रेटरी और दूसरे जरूरी कर्मचारियों को नियुक्त करने का अधिकार भी होगा।

सीईओ की नियुक्ति के अलावा ट्रस्ट ने तीन खाली पदों को भरने पर भी चर्चा है। एक पद अयोध्या के शाही परिवार के पूर्व प्रमुख और ट्रस्टी बिमलेन्द्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद खाली हुआ था, जबकि बाकी दो पद पूर्व जनरल सेक्रेटरी चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे के बाद खाली हुए हैं।

सूत्रों के अनुसार, कृष्ण मोहन ट्रस्ट के स्थायी महासचिव बनने की दौड़ में सबसे आगे हैं। इस बीच, ट्रस्टी के खाली पदों को लेकर भी चर्चा चल रही है और खबरों के मुताबिक, विहिप के राष्ट्रीय महासचिव बी.एल. बांगड़ा जैसे नामों पर विचार किया जा रहा है।

ट्रस्ट की चर्चाओं के नतीजों से राम मंदिर के भविष्य के प्रशासनिक ढांचे के तय होने की उम्मीद है, क्योंकि हालिया विवादों के बाद ट्रस्ट कामकाज और जवाबदेही को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।