सीवान, 3 जून । जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री के सरकारी घर को बड़ा करने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि बचत की मांग के बीच यह गैर-जरूरी है। उन्होंने बड़े बंगले के कॉम्प्लेक्स की बिजली और मेंटेनेंस कॉस्ट समेत सरकारी खर्च पर भी चिंता जताई और टैक्सपेयर्स के पैसे के इस्तेमाल में पारदर्शिता की मांग की।

प्रशांत किशोर ने कहा, "जब इस तरह के चाल-चरित्र चेहरा वाले व्यक्ति को आप मुख्यमंत्री बनाएंगे, तो उनसे आप शिक्षा, रोजगार की बात नहीं सुनेंगे। कह रहे हैं कि 'हरा गमछा' वाले को मारिए। मैं कह रहा हूं कि भैया, कल तक तो तुम खुद ही हरा गमछा लेकर घूम रहे थे। पूरे जीवन भर आप और आपके पिताजी तो हरा गमछा की ही राजनीति कर रहे थे। इनको गमछे के रंग से मतलब नहीं है, इनको सत्ता से मतलब है। अगर आज हरा गमछा वाले इनको कुर्सी पर बैठा दें, तो ये भगवा झंडा को गाली देने लगेंगे। आज भगवा वालों ने मुख्यमंत्री बनाया हुआ है, तो हरा गमछा पर बोल रहे हैं।"

उन्होंने कहा, "लोगों को यह समझने की जरूरत है कि हरे गमछे और भगवा गमछे से बिहार की समस्या का समाधान नहीं होगा। सम्राट चौधरी को ये बताना है कि 2 लाख आप कब देने वाले हो? 10,000 आपने दिया और जिन महिलाओं का वोट लिया, उनको 1,90,000 कब मिलेगा?"

प्रशांत किशोर ने कहा, "सम्राट चौधरी को ये बताना है कि 1 करोड़ युवाओं को नौकरी देने का वादा किए थे। छह महीने हो गए, उसके हिसाब से कम से कम 10 लाख लोगों को नौकरी मिलनी चाहिए थी। वो नौकरी न मिलके, टीआरई-4 के छात्रों पर लाठी क्यों चलवा रहे हैं?"

उन्होंने कहा, "सम्राट चौधरी को ये बताना है कि जिन गरीब लोगों के घर पर आप बुलडोजर चला रहे हैं, वो होटल मालिक के होटल पर कब बुलडोजर चलेगा? जिसके होटल में एक लड़की को 1:30 बजे रात में उसके पिता के सामने खींचा गया। गरीब का घर तोड़ना सबसे आसान है।"

उन्होंने कहा, "सम्राट चौधरी को ये बताना है कि जिन दलित, अति-पिछड़े समाज के लोगों को 3 डिसमिल जमीन आप नहीं दे पाए, आप अपना बंगला, जो मुख्यमंत्री का बंगला है, वो 10 एकड़ में क्यों बनाए हुए हैं? आप राबड़ी देवी को हटाने की बात कर रहे हैं। 1 अणे मार्ग जो पहले से था, उसमें देशरत्न मार्ग के चार एकड़ के बंगले को क्यों मिलाया गया है, सम्राट चौधरी को ये बताना है।"

उन्होंने कहा, "गमछे के कलर से लोगों को मतलब नहीं है, जिसको जो रंग अच्छा लगे, वो उस रंग का गमछा ले सकता है। हम लोग गरीबी का रंग खत्म करना चाहते हैं। बिहार में लोग भ्रष्टाचार का रंग खत्म करना चाहते हैं, पलायन का रंग खत्म करना चाहते हैं। लाल गमछा, हरा गमछा, इससे कुछ नहीं होने वाला है।"