पुणे। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) ड्रग इंस्पेक्टर पेपर लीक मामले में गिरफ्तार 7 आरोपियों की पुलिस कस्टडी सोमवार को खत्म होने के बाद, उन्हें सेशन कोर्ट में पेश किया गया। जहां से अदालत ने सभी 7 आरोपियों को ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया है। पुलिस ने कोर्ट से आरोपियों की कस्टडी की मांग नहीं की। 12 दिन की पुलिस कस्टडी के बाद सभी आरोपियों को कोर्ट द्वारा ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया गया है। अदालत ने आरोपियों को 21 सितंबर तक ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजा है।

मुंबई क्राइम ब्रांच ने 26 अगस्त को एमपीएससी के तीन अधिकारियों को पेपर लीक केस में गिरफ्तार किया था, जिनमें प्रवीण पाटिल, ऋतुजा पाटिल के पिता अमृत पाटिल और लोकेश उर्फ ​​गौरव पाटिल शामिल थे। वहीं, क्राइम ब्रांच ने 2 सितंबर को ऋतुजा पाटिल को इस मामले में गिरफ्तार किया था।

जानकारी के लिए बता दें कि एमपीएससी पेपर लीक की घटना के बाद महाराष्ट्र सरकार ने भर्ती परीक्षाओं को लेकर शनिवार को बड़ा फैसला लिया। सरकार ने भर्ती परीक्षा में होने वाली गड़बड़ी को रोकने के लिए एक हाई-लेवल कमेटी का गठन किया है, जो पेपर से लेकर रिजल्ट तक की पूरी व्यवस्था की समीक्षा करेगी।

सरकार ने भर्ती परीक्षा प्रणाली को ज्यादा पारदर्शी, सुरक्षित, विश्वसनीय और उम्मीदवार-केंद्रित बनाने के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति सिर्फ परीक्षा के पेपर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया की समीक्षा करेगी।

समिति यह देखेगी कि प्रश्नपत्र कैसे तैयार होते हैं, उनकी गोपनीयता कैसे बनाए रखी जाए, परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा और व्यवस्था कैसी हो, तकनीक का इस्तेमाल कैसे बढ़ाया जाए और नकल व अनुचित साधनों पर कैसे प्रभावी रोक लगाई जाए।

इसके अलावा, समिति को उम्मीदवारों की शिकायतों का निवारण और परीक्षा के दौरान उनके पूरे अनुभव को भी समीक्षा में शामिल किया गया है। इस समिति को बनाने के पीछे सरकार का मकसद साफ है। इसके जरिए सरकार भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और अनुचित साधनों पर रोक लगाकर उम्मीदवारों को एक भरोसेमंद और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था देना चाहती है।