पन्ना। देश का इकलौता हीरा उत्पादक जिला पन्ना अब वैश्विक पटल पर एक नई और विशिष्ट पहचान के साथ उभरेगा। भारत सरकार ने पन्ना के प्राकृतिक हीरों को भौगोलिक उपदर्शन यानी 'जियोग्राफिकल इंडिकेशन' (GI) टैग प्रदान किया है। इस ऐतिहासिक मान्यता के बाद अब यहां के हीरे आधिकारिक तौर पर 'पन्ना डायमंड' के नाम से जाने जाएंगे और इन्हें विश्व बाजार में एक प्रीमियम सर्टिफाइड नेचुरल प्रोडक्ट के रूप में बेचा जाएगा।
14-नेचुरल गुड्स कैटेगरी में मिली वैश्विक मान्यता
भारत सरकार ने यह जीआई टैग '14-नेचुरल गुड्स कैटेगरी' के तहत जारी किया है। इससे पन्ना के हीरों की मौलिकता और गुणवत्ता की कानूनी गारंटी मिलेगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नकली हीरों से सुरक्षा के साथ-साथ इसकी मांग और कीमत में भी बढ़ोतरी होगी। पन्ना में सरकारी और निजी दोनों तरह की भूमियों पर खनन पट्टे जारी कर परंपरागत तरीकों से हीरे निकालने का काम किया जाता है।
नीलामी प्रक्रिया और सरकारी राजस्व
हीरा खदानों से मिलने वाले हीरों को सुरक्षा मानकों के तहत पन्ना स्थित हीरा कार्यालय में जमा कराया जाता है। वर्ष 1961 से संचालित यह कार्यालय हर तीन माह में खुली नीलामी का आयोजन करता है, जिसमें मुंबई, गुजरात, दिल्ली और हैदराबाद जैसे बड़े व्यापारिक केंद्रों के खरीदार भाग लेते हैं। हीरों की इस नीलामी से सरकार को लगभग 12 प्रतिशत राजस्व की प्राप्ति होती है।
सीएम डॉ. मोहन यादव ने दी बधाई
पन्ना के हीरों को जीआई टैग मिलने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हर्ष व्यक्त करते हुए इसे पूरे मध्य प्रदेश के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि से पन्ना के हीरों की वैश्विक साख स्थापित होगी और स्थानीय युवाओं, कारीगरों व खनिकों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, जिससे बुंदेलखंड अंचल की अर्थव्यवस्था को नया संबल मिलेगा।
मध्य प्रदेश का 20वां जीआई टैग
'पन्ना डायमंड' को मिलाकर मध्य प्रदेश के खाते में अब कुल 20 जीआई टैग दर्ज हो चुके हैं। इससे पहले चंदेरी साड़ी, बाघ प्रिंट, रतलामी सेव, कड़कनाथ चिकन, चिन्नौर चावल, मुरैना गजक, सुंदरजा आम, शरबती गेहूं और गोंड पेंटिंग जैसे 19 उत्कृष्ट उत्पादों को यह प्रतिष्ठित पहचान मिल चुकी है।




