समूची दुनिया में जंग की दहशत चरम सीमा पर है। पडोसी देशों के तनावपूर्ण संबंध युद्ध के मुहाने पर पहुंचते जा रहे हैं। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के मध्य खूनी खेल शुरू हो चुका है जिसका भारत पर सीधा प्रभाव पडना स्वाभाविक ही है। विभाजन के बाद से ही पाकिस्तानी सत्ता ने भारत को अपना पैत्रिक दुश्मन मान लिया था। अनेक मंचों पर उसने भारत विरोधी एजेन्डा चलाया। हाल ही में उसने अफगान के साथ अपने कटुतापूर्ण संबंधों के लिए भारत को उत्तरदायी ठहराया जबकि उसके आन्तरिक हालात बद से बद्तर हो चुके हैं। कमर तोड मंहगाई, नागरिक सुविधाओं का अकाल, संसाधनों में हो रही निरंतर कटौती, टैक्स का बढता बोझ, अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर होती फजीहत, नस्तनाबूत होते आर्थिक हालात जैसे अनगिनत कारणों से वहां की आवाम का आक्रोश चरम सीमा पर पहुंचता जा रहा है। इतिहास गवाह है कि जब-जब पाकिस्तान के आन्तरिक हालात खराब हुए या सत्ता के विरोध की स्थितियां निर्मित हुईं तब-तब उसने मनगढन्त आरोप लगाकर भारत के साथ युद्ध के हालात निर्मित किये। सूत्रों की माने तो पाकिस्तान चारों ओर से समस्याओं का ग्रास बनाता है। संयुक्त अरब अमीरात ने उसे अप्रैल माह के अन्त तक 3.5 अरब डॉलर का कर्ज वापिस करने की चेतावनी दी है। वहां पर पेट्रोल लगभग 378 रुपये प्रति लीटर तथा डीजल 520रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। जनसुविधायें तार-तार हो चुकीं हैं। सत्ता पर कट्टरपंथियों का प्रभाव स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है। बलूचिस्तान में अलगाववादी आंदोलन, खैबर पख्तूनख्वा में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के आतंकी हमले, सिंध में राजनैतिक अस्थिरता ने सेना और सरकार को हिलाकर रख दिया है। ऐसे में तीसरे विश्वयुद्ध के हो चुके शंखनाद के मध्य पाकिस्तान भी भारत पर आक्रमण थोपने की तैयारी कर रहा है। वाक्य-युद्ध के तीर निरंतर जहरीले होते जा रहे हैं। अफगान समस्या के बहाने मिसाइलें दागने की फिराक में ताकि अपने देश की जनता का ध्यान स्थानीय समस्याओं से हटकर जंग की ओर लगाया जा सके। ईरान और अमेरिका के साथ डबल क्रास करने वाला आतंकपरस्त देश प्रत्यक्ष में तो अमेरिका का हमदर्द बनकर खडा दिख रहा है परन्तु ईरान को भी पर्दे के पीछे से पूरा सहयोग कर रहा है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि चीन और रूस के साथ-साथ पाकिस्तान भी ईरान को हथियारों की सप्लाई तथा परमाणु सहयोग कर रहा जिसकी जानकारी अमेरिका को लग चुकी है। इसी कारण अमेरिका ने मध्यस्थता के लिए ईरान के सामने पाकिस्तान को ही खडा कर दिया था जिस पर तेहरान ने पाकिस्तान के माध्यम से आए 15-सूत्रीय अमेरिकी युद्धविराम प्रस्ताव को अत्यधिक अनुचित बताकर ठुकरा दिया। पाकिस्तानी षडयंत्र निरंतर उजागर होते जा रहे हैं। दुनिया भर के मुस्लिम देशों का ठेकेदार बनने की कोशिश में लगा यह आतंकी देश अपने सहयोगियों के साथ मिलकर भारत को निशाना बनना चाहता है। वहां का खुफिया तंत्र, आतंकी संगठन तथा कट्टरपंथी जमातें भारत में मीरजाफरों की नई फसल पैदा करने में जुटीं हैं। लखनऊ में आतंकी हमले का षडयंत्र उजागर होते ही भितरघातियों के मंसूबे एक बार फिर सामने आ गये। मुफ्तखोरों की बिरादरी का राष्ट्रविरोधी एजेन्डा सफेदपोशों की आड में निरंतर फल-फूल रहा है। राजनैतिक दलों के सिद्धान्त, आदर्श और नीतियां केवल और केवल सत्ता हथियाने, पैसा का अम्बार लगाकर विदेशों में जमा करने तथा वंश की सात पीढियों को आर्थिक सुरक्षा देने तक सीमित होकर रह गयीं हैं। अनेक अवसरों पर सत्ता की तानशाही देखने को मिली तो कई बार विरोधियों द्वारा राष्ट्रहित के प्रस्तावों पर भी हल्लाबोला गया। राष्ट्रीय सीमा पर निर्मित हो रहे खतरनाक हालातों को जानबूझकर नजरंदाज करके विरोधी खेमे द्वारा सत्ता की शक्ति को आन्तरिक कलह से निपटने की ओर मोडने में लगा है। पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों की दुंदुभी बज चुकी है। इसे उपयुक्त अवसर मानकर पाकिस्तान ने देश में अशान्ति फैलाने हेतु अपने स्लीपर सेल सक्रिय कर दिये हैं। पश्चिम बंगाल के मालदा में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाकर आतंकियों ने भीड की शक्ल में दहशत फैलाने की कोशिश की। उल्लेखनीय है कि लगभग एक सप्ताह पहले ही अधिकारियों ने मालदा के जिला मजिस्ट्रेट को सुरक्षा में सेंध लगने की स्पष्ट आशंका करते हुए एक पत्र प्रेषित किया था। चर्चा तो यहां तक है कि प्रशासन में मौजूद स्लीपर सेल अपने आकाओं के इशारों पर निरंतर राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को संरक्षण देने, आन्तरिक हालात बिगाडने तथा चुनावों को प्रभावित करने के लिए काम कर रहे हैं ताकि आतंक के साये में चुनावों की औपचारिकतायें पूरी हो सकें। पाकिस्तान की बांग्लादेश के साथ बढ रही दोस्ती किसी से छुपी नहीं है। वर्तमान घटनाक्रम इस ओर संकेत करता है कि भारत को घेरने हेतु डीप स्टेट के साथ मिलकर पाकिस्तान एक विस्त्रित कार्य योजना तैयार कर चुका है जिसमें बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, मालदीप के कट्टरपंथी संगठन, आतंकी समूह और देश के भितरघातिये शामिल हैं। राष्ट्रहित के मुद्दों पर भी अनेक राजनैतिक दल विरोध में हालतौबा मचाने लगते हैं, प्रमाण मांगने लगते हैं और गुप्त रणनीति को उजागर करने हेतु बनाने लगते हैं दबाव। यहां यह कहना अतिशयोक्ति न होगा कि देश की सीमा पर निरंतर बिगडते हालातों ने जहां सुरसा के ऊपरी जबडे का रूप ले लिया है वहीं भितरघातियों के राष्ट्रविरोधी तेज होते षडयंत्र ने निचले जबडे की परिभाषा पूरी कर दी है। आम आवाम को महाबली की तरह ही बुद्धि, विवेक और शौर्य का प्रदर्शन करना होगा अन्यथा एक साथ बाह्य और आन्तरिक स्थितियां बिगडते देर रहीं लगेगी। इस बार बस इतना ही। अगले सप्ताह एक नई आहट के साथ फिर मुलाकात होगी।
भारत पर युद्ध थोपने की तैयारी में जुटा पाकिस्तान

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Saurabh Shukla
5 अप्रैल 2026, 07:05 am IST
Saurabh Shukla5 अप्रैल 2026, 07:05 am IST
