नई दिल्ली। सावन के आखिरी सोमवार को देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी है। श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ को जल अर्पित करने के साथ पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की।

सावन के चौथे और आखिरी सोमवार को दिल्ली के चांदनी चौक स्थित गौरीशंकर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। मंदिर पहुंची एक महिला श्रद्धालु ने कहा "मुझे बहुत खुशी हो रही है। मैं पहली बार गौरी शंकर मंदिर आई हूं। मेरे एक दोस्त ने मुझे इस जगह के बारे में बताया था और मुझे यहां का अनुभव बहुत अच्छा लग रहा है। मुझे यहां बहुत शांति महसूस हो रही है।"

सावन के चौथे सोमवार पर दिल्ली के मंगोलपुरी बी-ब्लॉक मंदिर में भक्तों ने पूजा-अर्चना की।

सावन के अंतिम सोमवार में उत्तर प्रदेश के बांदा के बंबेश्वर महादेव पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। महिलाएं हो या पुरुष सभी अपने आराध्य को जल चढ़ाने और जल अभिषेक करने के लिए बामेश्वर महादेव पहुंचे और अपने आराध्य की पूजा अर्चना की। ऐसी मान्यता है कि बंबेश्वर महादेव में महर्षि बामदेव ने भगवान शंकर की घोर तपस्या की थी।

सावन के चौथे सोमवार को अयोध्या में शिव भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। भक्तों ने बाबा नागेश्वर नाथ मंदिर में पूजा-अर्चना और दर्शन करने से पहले सरयू नदी में पवित्र डुबकी लगाई। एसपी सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी ने बताया कि पूरी अयोध्या में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं और इसे पांच जोन में बांटा गया है।

इसी तरह उत्तर प्रदेश के सीतापुर में बाबा श्यामनाथ मंदिर में कांवड़ियों और शिव भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। पुलिस और प्रशासन अलर्ट पर रहे। मंदिर परिसर और कांवड़ यात्रा के रास्ते पर कई पुलिस थानों के जवानों और पीएसी को तैनात किया गया।

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में सावन के आखिरी सोमवार को सुबह से ही बाबा बेलखरनाथ धाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर पूजा-अर्चना की। ग्रेटर नोएडा के बिसरख स्थित रावण मंदिर में भी बड़ी संख्या में भक्त जमा हुए और पूजा-अर्चना की।

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में सावन के आखिरी सोमवार को भगवान शिव को गंगाजल चढ़ाने के लिए प्रसिद्ध 84 घंटा मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त जमा हुए और जलाभिषेक किया। मंदिर पहुंचे एक भक्त का ने कहा, "यहां कांवड़ियों की भारी भीड़ है, ब्रजघाट से मुरादाबाद तक का रास्ता भक्तों से भरा हुआ है।"

प्रयागराज स्थित मनकामेश्वर मंदिर में हज़ारों भक्त भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक करने के लिए जुटे। भक्तों ने कतारों में लगकर भगवान शिव को गंगाजल, दूध, बेलपत्र और धतूरा चढ़ाया। मनकामेश्वर मंदिर के महंत धरानंद महाराज ने कहा, "मनकामेश्वर मंदिर एक प्राचीन तीर्थ स्थल है, जिसका उल्लेख पुराणों में कामेश्वर पीठ के रूप में मिलता है। मान्यता है कि जब भगवान राम संगम क्षेत्र में आए थे, तो उन्होंने माता सीता के साथ यहाँ जलाभिषेक किया था और अपनी यात्रा की सफलता के लिए प्रार्थना की थी।"

राजस्थान के जयपुर के शिव मंदिरों में बड़ी संख्या में भक्त जुटे। तड़केश्वर मंदिर में सुबह से ही भारी भीड़ देखी गई, जहां भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया।

अहमदाबाद में स्थित सरदारनगर के एक शिव मंदिर में भक्तों ने विशेष पूजा-अर्चना की और रुद्राभिषेक किया। एक भक्त ने कहा, "मैं पिछले तीन महीनों से यहां आ रहा हूं और लगभग हर सोमवार सुबह भस्म आरती में शामिल होने के लिए आता हूं।"

सावन के आखिरी सोमवार को हरिद्वार के शिव मंदिरों में बड़ी संख्या में भक्त जुटे। कनखल स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं। एक भक्त ने कहा, "आज सावन का आखिरी सोमवार है। माना जाता है कि यह भगवान शिव का ससुराल है।"

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के रवींद्र ने कहा, "भगवान शिव के लिए सोमवार का दिन बहुत खास माना जाता है क्योंकि 'सोम' का अर्थ चंद्रमा है और माना जाता है कि भगवान शिव ने इसे अपने सिर पर धारण किया है। जो भक्त सावन के दौरान भगवान शिव की पूजा नहीं कर पाए, वे आखिरी सोमवार को गंगाजल से जलाभिषेक कर सकते हैं और बेलपत्र चढ़ा सकते हैं।"