छतरपुर। केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना के अंतर्गत ग्राम ढौढ़न से विस्थापित कर ग्राम करौंदिया में बसाए गए परिवारों की मूलभूत सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। भारी बारिश के चलते नवीन बसाहट में सामने आई जलभराव की समस्या का प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने त्वरित संज्ञान लेते हुए मौके पर ही प्रभावी निराकरण कराया।


अस्थायी चैनल बनाकर प्राकृतिक नाले में डायवर्ट किया पानी

कलेक्टर के निर्देश पर जिला एवं जनपद स्तरीय अधिकारियों के संयुक्त दल ने करौंदिया स्थित नवीन पुनर्वास बस्ती का स्थलीय निरीक्षण किया। विगत दो-तीन दिनों से जारी मूसलाधार बारिश के चलते बसाहट के चार स्थानों और पिछले हिस्से में बने एक गड्ढे में अस्थायी जलभराव देखा गया था। टीम ने बिना विलंब जेसीबी व श्रमिकों के माध्यम से कच्चे चैनल तैयार कराए और जमा पानी को सुरक्षित रूप से बस्ती के पीछे स्थित प्राकृतिक नाले की ओर डायवर्ट कर दिया, जिससे जलभराव पूरी तरह समाप्त हो गया।


सुरक्षा फेंसिंग का कार्य शुरू, कुओं में डाली क्लोरीन की गोलियां

बस्ती में निवासरत परिवारों और बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने जलभराव वाले बड़े गड्ढे के चारों ओर तत्काल प्रभाव से सुरक्षा फेंसिंग लगाने का काम शुरू करा दिया है, ताकि कोई अप्रिय दुर्घटना न हो। इसके साथ ही संक्रामक बीमारियों से बचाव और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी पेयजल कूपों में निर्धारित मात्रा में क्लोरीन की गोलियां डलवाई गईं।


स्थायी अधोसंरचना के लिए तैयार हुआ डीपीआर

विस्थापित परिवारों को दीर्घकालिक और व्यवस्थित आवासीय परिवेश देने के लिए शासन स्तर पर व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है:

  • स्थायी जलनिकासी: संपूर्ण नवीन बसाहट में पक्की सीसी नालियों का जाल बिछाया जाएगा।
  • मूलभूत नागरिक सुविधाएं: बस्ती में गुणवत्तापूर्ण डामर व सीसी सड़कें, विद्युत ग्रिड, आधुनिक सामुदायिक भवन, आंगनवाड़ी केंद्र और प्राथमिक शाला भवन का निर्माण प्रस्तावित है।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, कार्ययोजना को सक्षम स्तर से तकनीकी स्वीकृति मिलते ही सभी स्थायी निर्माण कार्य प्राथमिकता के आधार पर प्रारंभ कराए जाएंगे, जिससे विस्थापित परिवारों को सभी आवश्यक नागरिक सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकें।