रीवा/भोपाल। नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET 2026) के पेपर लीक होने और परीक्षा रद्द होने से आहत होकर मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले की होनहार छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी (स्नेहा) द्वारा आत्महत्या किए जाने का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ता जा रहा है। गुरुवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस दुखद घटना को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक बेहद तीखी पोस्ट साझा की, जिसने देश के सियासी गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है। राहुल गांधी ने इस संवेदनशील मुद्दे पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की शिक्षा नीति को आड़े हाथों लिया है। बता दें कि मऊगंज के नईगढ़ी अंतर्गत मगनिया (पुरवा) गांव निवासी किसान कृष्णकुमार चतुर्वेदी की बेटी आकांक्षा डॉक्टर बनने का सपना संजोए नागपुर में रहकर नीट की तैयारी कर रही थी, लेकिन पेपर लीक की अनिश्चितता से टूटकर उसने गत 20 मई को नागपुर में ही मौत को गले लगा लिया था।
इस हृदयविदारक घटना पर अपनी गहरी संवेदना और आक्रोश व्यक्त करते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने लिखा कि आकांक्षा डॉक्टर बनकर देश और समाज की सेवा करना चाहती थी। उसके पिता एक साधारण किसान हैं, जिन्होंने अपनी बेटी के डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) पर 3 लाख रुपये का कर्ज लिया था। इतना ही नहीं, बेटी की कोचिंग का खर्च उठाने और उसकी देखभाल के लिए पिता ने खुद नागपुर में एक कुक (रसोइया) की नौकरी तक कर ली थी। राहुल गांधी ने आगे लिखा कि एक बेबस पिता अपनी बेटी के लिए जो कुछ भी कर सकता था, उसने सब किया; लेकिन इसके बाद नीट का पेपर लीक हो गया और परीक्षा रद्द कर दी गई। इस मानसिक तनाव और अनिश्चितता के माहौल में आकांक्षा हमें छोड़कर चली गई।
केंद्र सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि आकांक्षा की मौत महज एक आत्महत्या नहीं है, बल्कि यह मोदी जी की एक भ्रष्ट और पूरी तरह टूट चुकी प्रशासनिक व्यवस्था की देन है। उन्होंने शिक्षा मंत्री पर तंज कसते हुए पूछा कि क्या धर्मेंद्र प्रधान जी आज भी अपनी कुर्सी पर बने हुए हैं? वही पुरानी कमेटियां, वही तबादले और वही लीपापोती वाली जांच चल रही है, जिससे न तो कोई सुधार हो रहा है और न ही पीड़ितों को न्याय मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में देश की शिक्षा व्यवस्था को जिस बेरहमी से बर्बाद किया गया है, उसकी भारी कीमत आज भारत की एक पूरी युवा पीढ़ी अपनी जान देकर चुका रही है।
इस बीच, पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने के लिए एनएसयूआई (NSUI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ मऊगंज स्थित आकांक्षा के पैतृक गांव पहुंचे। उन्होंने शोकाकुल माता-पिता से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और संगठन की ओर से 2.5 लाख रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता राशि का चेक सौंपा। जाखड़ ने इस मुलाकात का वीडियो साझा करते हुए लिखा कि मोदी सरकार के इस सड़े हुए सिस्टम ने देश के न जाने कितने होनहार छात्रों को हमसे असमय छीन लिया है। हम आकांक्षा को वापस तो नहीं ला सकते, लेकिन उसके पिता के सिर पर लदे 3 लाख रुपये के कर्ज के बोझ को कम करने के लिए एनएसयूआई ने 2 लाख 50 हजार रुपये की मदद की है, और शेष 50 हजार रुपये भी जल्द ही एकत्रित कर परिवार तक पहुंचा दिए जाएंगे।
मृतका के पिता कृष्णकुमार चतुर्वेदी ने रोते हुए बताया कि उनकी बेटी आकांक्षा शुरुआत से ही पढ़ाई में बेहद मेधावी और अव्वल थी। इस साल नीट की परीक्षा देने के बाद वह बेहद खुश थी और उसने पूरे भरोसे के साथ कहा था कि उसका पेपर बहुत शानदार गया है और उसे देश के किसी अच्छे सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिल जाएगा। लेकिन इसके बाद जैसे ही देशव्यापी पेपर लीक और दोबारा परीक्षा होने की खबरें आईं, वह गहरे अवसाद में चली गई। आत्महत्या करने से पहले आकांक्षा ने एक मर्मस्पर्शी सुसाइड नोट भी छोड़ा है, जिसमें उसने लिखा— "मम्मी-पापा, आपका मुझ पर पूरा भरोसा था कि मेरी बेटी पढ़ लेगी और डॉक्टर बन जाएगी। पर दोबारा नीट परीक्षा देने की हिम्मत अब मेरे अंदर नहीं बची है। पहले नीट के पेपर में मेरे बहुत अच्छे मार्क्स आ रहे थे, पर दोबारा पेपर उतना ही अच्छा जाए, इसकी कोई गारंटी नहीं है। सॉरी मम्मी-पापा… मैंने आप दोनों का सब कुछ बर्बाद कर दिया। आपकी स्नेहा।" इस सुसाइड नोट ने पूरे क्षेत्र की आंखें नम कर दी हैं और छात्र संगठनों में भारी आक्रोश है।



