दुनिया के सबसे अमीर शख्स इलॉन मस्क की कुल संपत्ति 850 बिलियन डॉलर (करीब 77 लाख करोड़ रुपए) के आंकड़े को पार कर गई है। फोर्ब्स के मुताबिक, मस्क अब इतिहास के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं।
सिर्फ एक दिन में उनकी नेटवर्थ में 84 बिलियन डॉलर (करीब 7 लाख करोड़ रुपए) का इजाफा हुआ है। यह उछाल उनकी रॉकेट कंपनी स्पेसएक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप xAI के मर्जर के बाद आया है।
4 महीनों में 70% बढ़ी नेटवर्थ
अक्टूबर 2025 में इलॉन मस्क की कुल संपत्ति 500 बिलियन डॉलर थी। महज चार महीनों में उनकी दौलत 70% बढ़कर 850 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई। मस्क की मौजूदा नेटवर्थ पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल की GDP से भी ज्यादा है। इतना ही नहीं, यह भारत के टॉप-40 सबसे अमीर लोगों की कुल संपत्ति से भी अधिक है।
स्पेसएक्स और xAI का मर्जर, $1.25 ट्रिलियन की कंपनी बनी
इलॉन मस्क की रॉकेट बनाने वाली कंपनी स्पेसएक्स ने उनकी AI कंपनी xAI का अधिग्रहण कर लिया है। पहले दोनों कंपनियां अलग-अलग थीं, लेकिन अब मर्जर के बाद एक ही मेगा कंपनी बन गई हैं। नई बनी कंपनी की कुल वैल्यू $1.25 ट्रिलियन (करीब 104 लाख करोड़ रुपए) आंकी गई है। इस मर्जर से मस्क की व्यक्तिगत संपत्ति में 84 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई।
मर्जर से पहले: स्पेसएक्स में 42% हिस्सेदारी — वैल्यू $336 बिलियन xAI में 49% हिस्सेदारी — वैल्यू $122 बिलियन
मर्जर के बाद: नई कंपनी में 43% हिस्सेदारी — वैल्यू $542 बिलियन
4 महीनों में मस्क ने बनाए 4 बड़े रिकॉर्ड
अक्टूबर 2025: दुनिया के पहले $500 बिलियन वाले इंसान बने
15 दिसंबर: स्पेसएक्स की वैल्यूएशन बढ़ने से $600 बिलियन पार
19 दिसंबर: टेस्ला स्टॉक ऑप्शंस बहाल होने पर $700 बिलियन क्लब में एंट्री
जनवरी 2026: स्पेसएक्स-xAI मर्जर के बाद $850 बिलियन नेटवर्थ
दूसरे नंबर के अमीर से तीन गुना आगे मस्क
दुनिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति, गूगल के को-फाउंडर लैरी पेज, की कुल संपत्ति 281 बिलियन डॉलर है। मस्क उनसे 578 बिलियन डॉलर ज्यादा अमीर हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, जिस रफ्तार से मस्क की संपत्ति बढ़ रही है, वे जल्द ही दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर (1000 अरब डॉलर) बन सकते हैं।
इलॉन मस्क की प्रमुख कंपनियां
टेस्ला: 2003 में स्थापित टेस्ला में मस्क 2004 में बड़े निवेशक बने। बाद में वे कंपनी के CEO बने। टेस्ला का लक्ष्य इलेक्ट्रिक गाड़ियों और सस्टेनेबल एनर्जी को बढ़ावा देना है।
स्पेसएक्स: 2002 में शुरू की गई स्पेसएक्स का मकसद स्पेस लॉन्च की लागत घटाना और मंगल ग्रह पर इंसानी बस्ती बसाना है।
न्यूरालिंक: 2016 में स्थापित न्यूरालिंक का लक्ष्य इंसानी दिमाग और कंप्यूटर को जोड़ने वाली ब्रेन-मशीन इंटरफेस तकनीक विकसित करना है।

