मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा का तीन सप्ताह का मानसून सत्र सोमवार से शुरू होने जा रहा है। 10 जुलाई तक चलने वाला यह सत्र राजनीतिक उठापटक और मौसम संबंधी चुनौतियों के बीच काफी हंगामेदार रहने की संभावना है। एक ओर कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर सियासी माहौल गर्म है, वहीं दूसरी ओर अनियमित मानसून और किसानों की समस्याएं सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

सत्र से पहले राज्य की राजनीति में ‘ऑपरेशन टाइगर’ चर्चा का केंद्र बना हुआ है। विपक्ष का आरोप है कि सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के कुछ लोकसभा सांसदों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रहा है। शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने हाल ही में पार्टी के 60वें स्थापना दिवस पर कथित बागी नेताओं को "बेशर्म और एहसान फरामोश" बताते हुए तीखा हमला बोला था।

इस बार विधानसभा और विधान परिषद, दोनों सदनों में आधिकारिक नेता प्रतिपक्ष नहीं होने की संभावना है। ऐसे में सत्ता पक्ष इस स्थिति का लाभ उठाकर अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने ‘ऑपरेशन टाइगर’ के जवाब में ‘ऑपरेशन वुल्फ’ शुरू करने की चेतावनी दी है, जिससे सदन में विपक्ष के आक्रामक रुख के संकेत मिल रहे हैं।

सत्तारूढ़ गठबंधन मानसून सत्र के पहले सप्ताह में विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए चुनाव कराने की तैयारी में है। शिवसेना नेता नीलम गोरहे के दोबारा विधान परिषद सदस्य चुने जाने के बाद उन्हें फिर से इस पद पर बैठाने की संभावना जताई जा रही है।

सदन के भीतर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच राज्य के किसानों की समस्याएं भी प्रमुख मुद्दा रहेंगी। महाराष्ट्र में अनियमित और लंबे समय तक कमजोर मानसून ने कृषि क्षेत्र की चिंताएं बढ़ा दी हैं। सरकार किसानों को जल्दबाजी में बुवाई न करने और मौसम विभाग की अगली सलाह का इंतजार करने की अपील कर चुकी है।

राज्य के 3,000 से अधिक जलाशयों में जलस्तर लगातार घट रहा है, जिसके चलते सरकार ने कई राहत और बचाव उपाय शुरू किए हैं। हालांकि विपक्ष का आरोप है कि एल नीनो के कारण पैदा हुई सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने पर्याप्त तैयारी नहीं की।

खरीफ फसलों की बुवाई पर भी अनिश्चित मौसम का असर पड़ा है। विपक्ष 36,585 करोड़ रुपये की कृषि ऋण माफी योजना की शर्तों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। विपक्ष बिना शर्त कर्ज माफी और फसल नुकसान की तत्काल भरपाई की मांग उठाएगा।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और कृषि मंत्री दत्ता भराणे का कहना है कि सरकार ने ऋण माफी योजना की कई शर्तों में ढील दी है और अब तक 40 लाख से अधिक किसानों को इसका लाभ मिल चुका है।

विपक्ष महंगाई, पश्चिम एशिया संघर्ष के असर, नीट परीक्षा विवाद, महिलाओं के खिलाफ अपराध, कानून-व्यवस्था, मराठा-ओबीसी आरक्षण विवाद, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और अनुसूचित जाति आरक्षण के उप-वर्गीकरण जैसे मुद्दों पर भी सरकार को घेरने की तैयारी में है।

वहीं सरकार मराठा और ओबीसी समुदायों से जुड़े मुद्दों के समाधान, पुलिस आधुनिकीकरण, नशे के बढ़ते कारोबार पर नियंत्रण और महिलाओं की सुरक्षा के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियां गिनाने की तैयारी में है। सरकार महिला किसानों को सशक्त बनाने संबंधी एक विधेयक भी पेश कर सकती है तथा किसानों और आम जनता को राहत देने के लिए राजस्व विभाग से जुड़े कई सुधारात्मक कदमों की घोषणा कर सकती है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सत्र सामान्य विधायी कार्यवाही से ज्यादा राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन और दबदबा स्थापित करने की लड़ाई का मंच बनेगा। पूरक बजट मांगों की मंजूरी के साथ शुरू होने वाले इस सत्र में तीखी बहस, नारेबाजी, वॉकआउट और राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकते हैं। महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में यह मानसून सत्र राज्य के राजनीतिक और आर्थिक भविष्य की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है।