MP में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी: जनसंपर्क की कमान मनीष सिंह के हाथ

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भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने प्रशासनिक तंत्र में नई कसावट लाने और शासन की कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी व चुस्त-दुरुस्त बनाने के उद्देश्य से भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारियों की एक बड़ी सूची जारी कर भारी फेरबदल किया है। इस प्रशासनिक सर्जरी के तहत जनसंपर्क, आबकारी, स्वास्थ्य, वन और कृषि जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील विभागों के नेतृत्व में आमूलचूल परिवर्तन किए गए हैं। सरकार के इस कदम को आगामी बजट और नई योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक बड़े मास्टरस्ट्रोक के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ अनुभवी और सख्त अधिकारियों को मुख्यधारा में वापस लाया गया है।

प्रशासनिक फेरबदल की इस फेहरिस्त में सबसे अधिक चर्चा मनीष सिंह की है, जिन्हें अब मध्य प्रदेश का नया आयुक्त, जनसंपर्क नियुक्त किया गया है। अपनी त्वरित कार्यशैली और सख्त निर्णयों के लिए पहचाने जाने वाले मनीष सिंह के कंधों पर अब सरकार की छवि और योजनाओं को जनता तक प्रभावी ढंग से पहुँचाने की जिम्मेदारी होगी। वहीं, राजस्व अर्जन के सबसे बड़े स्रोत माने जाने वाले आबकारी विभाग की कमान वरिष्ठ आईएएस दीपक सक्सेना को सौंपी गई है। दीपक सक्सेना को आयुक्त आबकारी की जिम्मेदारी मिलना विभाग में नई शुचिता और सख्ती का संकेत माना जा रहा है।
वरिष्ठता के क्रम में भी सरकार ने कई बड़े पदों पर परिवर्तन किए हैं। अपर मुख्य सचिव (ACS) अशोक वर्णवाल को अब प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुधारने का अहम जिम्मा सौंपते हुए स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ किया गया है। इसी कड़ी में संदीप यादव को प्रमुख सचिव, वन विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है, जबकि राजभवन में अपनी सेवाएं दे रहे उमाशंकर भार्गव को वापस बुलाकर कृषि विकास जैसे महत्वपूर्ण विभाग में बड़ी भूमिका दी गई है। ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव करते हुए अजय गुप्ता को जबलपुर विद्युत वितरण कंपनी का प्रबंध संचालक (MD) बनाया गया है, तो वहीं अभिजीत अग्रवाल को भी एमडी के पद पर नई पदस्थापना दी गई है।
इस पूरी कवायद का एक और महत्वपूर्ण पहलू जिला स्तर पर जमीनी प्रशासन को मजबूत करना है। सरकार ने लंबे समय से खाली पड़े सीईओ जिला पंचायत के पदों पर भी नई नियुक्तियां कर दी हैं, जिससे ग्रामीण विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं की मॉनिटरिंग में अब तेजी आने की उम्मीद है। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस फेरबदल के जरिए यह साफ संदेश दे दिया है कि उनकी प्राथमिकता सुशासन और पारदर्शिता है, जिसके लिए उन्होंने अपने विश्वसनीय और अनुभवी अधिकारियों की नई टीम मैदान में उतार दी है।
