कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के बागी लोकसभा सांसदों का ग्रुप टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने पर विचार कर रहा है। बागी लोकसभा सांसदों का नेतृत्व चार बार के सांसद डॉ. काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय कर रही हैं।
ये सभी त्रिपुरा स्थित नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हो गए। मानहानि मुकदमा का यह विचार महुआ मोइत्रा के एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर किया जा रहा है।
हाल ही में सोशल मीडिया पर महुआ मोइत्रा के एक पोस्ट को लेकर विवाद सामने आया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में तृणमूल कांग्रेस के दो बागी सांसदों पर आरोप लगाया था कि उन्होंने पैसे के बदले पार्टी छोड़कर एनसीपीआई जॉइन किया है। मोइत्रा ने दावा किया कि हर सांसद को एनसीपीआई में शामिल होने के लिए कम से कम 40 करोड़ रुपए मिले।
हाल ही में महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना के कई सांसदों के बागी होने का भी मामला सामने आया है। अफवाहें हैं कि वे ठाकरे को छोड़कर एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं। ठाकरे गुट के संजय राउत ने हाल ही में एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन पर 15 करोड़ रुपए लेकर धोखा देने का आरोप लगाया था।
इसी पोस्ट को साझा करते हुए महुआ मोइत्रा ने बागी तृणमूल कांग्रेस सांसदों पर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने लिखा, ''सिर्फ 15 करोड़? इतने सस्ते में क्यों जा रहे हैं? हमारे सूत्रों के अनुसार उन्हें 4 करोड़ रुपए एडवांस और बाकी 36 महीनों तक 1 करोड़ रुपए प्रति माह मिल रहे हैं।''
सूत्रों के अनुसार, विभिन्न राज्यों में फैले टीएमसी के बागी सांसदों ने रविवार दोपहर एक वर्चुअल बैठक की, जिसमें महुआ मोइत्रा के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने पर चर्चा हुई।
इस संभावना की पुष्टि करते हुए शताब्दी रॉय ने कहा कि वे इस पर विचार कर रहे हैं। सिर्फ बागी सांसद ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल विधानसभा के बागी विधायकों पर भी महुआ मोइत्रा द्वारा सोशल मीडिया पर लगातार तीखे हमले किए जा रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया है कि ये सांसद और विधायक टीएमसी के टिकट पर चुनाव जीतकर पार्टी के साथ धोखा कर रहे हैं और उन्हें पहले इस्तीफा देना चाहिए, उसके बाद ही पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बोलना चाहिए।

