कोच्चि, 1 जून । केरल हाई कोर्ट ने सोमवार को कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) की एक याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। इस याचिका में सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की मनी लॉन्ड्रिंग जांच को चुनौती दी गई है। यह मामला हाल के वर्षों में राज्य के सबसे चर्चित कानूनी और राजनीतिक मामलों में से एक रहा है।न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी. और के.वी. जयकुमार की खंडपीठ ने कहा कि फैसला शुक्रवार को सुनाया जाएगा।
अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को निर्देश दिया कि वह फैसला सुनाए जाने तक इस मामले में अपीलकर्ताओं के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई शुरू न करे।
यह अस्थायी सुरक्षा तब दी गई, जब सीएमआरएल की ओर से पेश हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने यह चिंता जताई कि जब तक मामला विचाराधीन है, तब तक कंपनी के अधिकारियों को परेशान किया जा सकता है।
इसके बाद अदालत ने ईडी से यह आश्वासन लिया कि जब तक फैसला नहीं सुनाया जाता, तब तक अपीलकर्ताओं के खिलाफ कोई भी जल्दबाजी वाली कार्रवाई नहीं की जाएगी।
हालांकि, अदालत ने यह साफ किया कि यह सुरक्षा केवल अदालत में मौजूद याचिकाकर्ताओं पर लागू होगी और उन लोगों पर नहीं होगी, जो इस अपील में पक्षकार नहीं हैं।
लंबी सुनवाई के दौरान सीएमआरएल ने ईडी की जांच के आधार को ही कड़ी चुनौती दी।
कंपनी ने तर्क दिया कि एजेंसी ने बिना किसी ‘मूल’ या ‘निर्धारित अपराध’ के ही कार्रवाई शुरू कर दी थी, जबकि ‘धन शोधन निवारण अधिनियम’ (पीएमएलए) के तहत इसे लागू करने के लिए यह एक जरूरी शर्त होती है।
इसमें तर्क दिया गया कि जब ईडी ने अपनी एनफोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की और समन जारी करना शुरू किया, तब न तो कोई एफआईआर दर्ज थी और न ही कोई औपचारिक शिकायत मौजूद थी।
ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ए.आर.एल. सुंदरेशन और विशेष वकील जोहेब हुसैन ने जवाब दिया कि एजेंसी के पास उपलब्ध सामग्री के आधार पर जानकारी मांगने और जांच करने का पूरा अधिकार है।
एजेंसी ने तर्क दिया कि कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) द्वारा एक्सालॉजिक को किए गए भुगतानों से जुड़े सवाल और गंभीर एसएफआईओ की जांच में सामने आए निष्कर्ष विस्तृत जांच की मांग करते हैं।
पीठ मौजूदा चरण में जांच में दखल देने को लेकर अनिच्छुक दिखी और उसने बार-बार यह सवाल उठाया कि एजेंसी को अपनी जांच पूरी करने की अनुमति क्यों नहीं दी जानी चाहिए।
जजों ने टिप्पणी की कि अगर कंपनी ने कोई गलत काम नहीं किया है, तो वह जरूरी दस्तावेज और रिकॉर्ड पेश करके अपनी बेगुनाही साबित कर सकती है।
इस मामले को इसलिए बहुत राजनीतिक महत्व मिला है, क्योंकि इसमें पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की बेटी वीणा विजयन की कंपनी ‘एक्सालॉजिक’ से जुड़े वित्तीय लेन-देन को लेकर आरोप लगाए गए हैं।




