नई दिल्ली, 14 सितंबर । विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग पर भारत-वियतनाम संयुक्त आयोग के 19वें सत्र की बैठक को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने वियतनाम के विदेश मंत्री ले होआई ट्रुंग और उनके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मुझे यह देखकर बहुत खुशी हो रही है कि तीन साल पहले हुई पिछली संयुक्त आयोग की बैठक के बाद से हमारे द्विपक्षीय संबंधों में काफी प्रगति हुई है।
इस दौरान वियतनाम की ओर से दो महत्वपूर्ण राजकीय यात्राएं हुई हैं। इनमें सबसे हाल की यात्रा वियतनाम के महासचिव और राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा रही। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के नेताओं ने आपसी संबंधों को बढ़ाकर 'एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' के स्तर तक पहुंचाया।
उन्होंने कहा कि यह खास बात है कि इस क्षेत्र में वियतनाम पहला देश है, जिसके साथ भारत के संबंध इस स्तर तक पहुंचे हैं। इसलिए संयुक्त आयोग की यह 19वीं बैठक हमारे लिए एक बहुत अच्छा अवसर है, ताकि हम अब तक किए गए वादों और समझौतों की प्रगति की समीक्षा कर सकें और दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व द्वारा बनाए गए सकारात्मक माहौल को आम लोगों के लिए ठोस और वास्तविक परिणामों में बदल सकें।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत के लिए वियतनाम 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी', 'महासागर' दृष्टिकोण और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की हमारी सोच का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। वियतनाम, आसियान के साथ हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के प्रयासों में भी एक अहम सहयोगी है।
उन्होंने बताया कि पिछले दो दिनों में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में साझेदार देश के रूप में प्रधानमंत्री की सार्थक भागीदारी के लिए हम उनका धन्यवाद करते हैं।
मैं आज आपके साथ उपयोगी और सकारात्मक चर्चा की उम्मीद करता हूं और यहां उपस्थित सभी लोगों का स्वागत करता हूं।




