तीन साल बाद मुस्कुराया मासूम: बीएमसी में फाइबर-ऑप्टिक तकनीक से जबड़े की जटिल सर्जरी सफल

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सागर, जीशान खान। मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) में एक बार फिर चिकित्सा कौशल और आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम देखने को मिला। कॉलेज के डेंटल और एनेस्थीसिया विभाग की संयुक्त टीम ने 9 वर्षीय मासूम का सफल ऑपरेशन कर उसे टेम्पोरो-मैंडिबुलर जॉइंट एंकायलोसिस जैसी जटिल बीमारी से मुक्ति दिलाई। बच्चा पिछले तीन वर्षों से अपना मुंह नहीं खोल पा रहा था और केवल तरल आहार पर निर्भर था।
तीन साल से बंद था मुंह, केवल लिक्विड डाइट पर जीवन
परिजनों के अनुसार, बच्चे का मुंह पिछले तीन वर्षों से लगभग पूरी तरह बंद था। वह न तो सामान्य भोजन कर पा रहा था और न ही स्पष्ट बोल पाता था। थ्री-डी सीटी स्कैन में जबड़े की हड्डियों के आपस में जुड़ जाने की पुष्टि हुई, जिसे चिकित्सकीय भाषा में टीएमजे एंकायलोसिस कहा जाता है। यह स्थिति न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और पोषण संबंधी गंभीर प्रभाव भी छोड़ती है।
एनेस्थीसिया सबसे बड़ी चुनौती
इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी चुनौती थी—बच्चे को सुरक्षित रूप से बेहोश करना। मुंह पूरी तरह बंद होने के कारण सामान्य इंट्यूबेशन संभव नहीं था। एनेस्थीसिया विभाग की टीम ने डॉ. शशि वाला के नेतृत्व में नेजल फाइबर-ऑप्टिक इंट्यूबेशन’ तकनीक का उपयोग किया। यह अत्यंत सटीक और उच्च कौशल वाली प्रक्रिया है, जिसमें नाक के रास्ते विशेष फाइबर-ऑप्टिक उपकरण की सहायता से श्वासनली में ट्यूब डाली जाती है। डॉक्टरों के अनुसार, यह चरण सफल न होता तो पूरी सर्जरी जोखिम में पड़ सकती थी।
सटीक सर्जरी, तुरंत मिला परिणाम
डेंटल सर्जरी विभाग की डॉ. श्वेता भटनागर और उनकी टीम ने जटिल मैक्सिलोफेशियल सर्जरी को अत्यंत सावधानी और तकनीकी दक्षता के साथ अंजाम दिया। ऑपरेशन के तुरंत बाद बच्चा 30 मिमी से अधिक मुंह खोलने में सक्षम हो गया जो इस तरह के मामलों में अत्यंत संतोषजनक परिणाम माना जाता है। ऑपरेशन के बाद डॉ. सर्वेश जैन की देखरेख में बच्चे को आईसीयू में रखा गया। स्थिति स्थिर रहने पर उसे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है।
बीएमसी के डीन डॉ. पी.एस. ठाकुर ने बताया कि ऑपरेशन के तुरंत बाद अपेक्षित परिणाम प्राप्त हुए हैं। अब नियमित फिजियोथेरेपी से बच्चे की जबड़े की कार्यक्षमता और बेहतर होगी।।मीडिया प्रभारी डॉ. सौरभ जैन ने कहा कि इस सफल सर्जरी के बाद बच्चा अब सामान्य भोजन कर सकेगा और स्पष्ट रूप से बोल पाएगा। परिजनों ने डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और विशेष रूप से सुश्री प्रियंका का हृदय से आभार व्यक्त किया।
