छतरपुर। मध्य प्रदेश कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी कलह एक बार फिर सार्वजनिक रूप से खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश महासचिव राकेश सिंह यादव ने पार्टी से इस्तीफा देने का दावा करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (पीसीसी चीफ) जीतू पटवारी और संगठन प्रभारी हरीश चौधरी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। यादव ने तीखा हमला बोलते हुए जीतू पटवारी को इस पद के योग्य नहीं बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पटवारी लगातार संगठन को कमजोर कर रहे हैं, मनमाने फैसले ले रहे हैं और पार्टी के भीतर असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा, यादव ने आरोप लगाया कि हरीश चौधरी ने पंजाब में टिकट बेचे और पटवारी ने उन्हें डिफेंडर दी।
सबूत मांगने पर नोटिस थमाने का दावा, लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन की बात
राकेश सिंह यादव ने अपनी तीन दशकों से अधिक की राजनीतिक सक्रियता का हवाला देते हुए कहा कि वे लंबे समय से कांग्रेस में विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में 'वीर भूमि न्यास' को लेकर लगाए गए आरोपों के संबंध में जब उन्होंने खुद पार्टी नेतृत्व से सबूत मांगे, तो उन्हें जवाब देने के बजाय उलटा अनुशासनहीनता का नोटिस थमा दिया गया। यादव के अनुसार, पार्टी की ओर से मीडिया बहिष्कार और मौन सत्याग्रह जैसे कई निर्देश तो दिए गए, लेकिन लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज सामने नहीं रखे गए। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि सवाल पूछना और सार्वजनिक मुद्दों पर अपनी बात रखना एक लोकतांत्रिक अधिकार है, जिसे दबाने की कोशिश की जा रही है।
वीर भूमि न्यास मामले में उठाए सवाल, आरोपों को बताया निराधार
यादव ने वीर भूमि न्यास से जुड़े कथित घोटाले के आरोपों को पूरी तरह से निराधार और तथ्यों से परे बताया। उन्होंने दलील दी कि पूर्व में भी विभिन्न सरकारों द्वारा अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों को रियायती दरों पर जमीन आवंटित की जाती रही है, इसलिए ऐसे मामलों को सीधे तौर पर भ्रष्टाचार बताना गलत है। यादव ने आरोप लगाया कि बिना किसी पर्याप्त दस्तावेज और पुख्ता प्रमाण के इतने गंभीर आरोप लगाकर पार्टी का वर्तमान नेतृत्व स्वयं ही बड़े विवादों में घिर गया है।
राहुल गांधी की कार्यशैली और संगठन नेतृत्व पर तीखा प्रहार
पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते हुए यादव ने राहुल गांधी की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर गलत लोगों को जानबूझकर बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने संगठन सृजन अभियान और हालिया संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर भी गंभीर गड़बड़ियों के आरोप लगाए। यादव ने चेतावनी भरे लहजे में दावा किया कि प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति दिन-ब-दिन कमजोर होती जा रही है और यदि इस संगठनात्मक ढांचे में तुरंत सुधार नहीं किया गया, तो आगामी नगरीय निकाय चुनावों में पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
नया विवाद: राकेश सिंह का इस्तीफा या पार्टी से निष्कासन?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। एक तरफ जहां राकेश सिंह यादव स्वयं मीडिया के सामने पार्टी से इस्तीफा देने की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस संगठन का आधिकारिक तौर पर दावा है कि यादव ने इस्तीफा नहीं दिया है, बल्कि उन्हें घोर अनुशासनहीनता के कारण पार्टी से निष्कासित किया गया है और इसके लिए बाकायदा पत्र भी जारी किया जा चुका है। इस्तीफे और निष्कासन की इस जंग ने अब मध्य प्रदेश के सियासी गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

