गाजा। हमास ने गाजा में बनी इमरजेंसी गवर्नमेंट कमेटी को भंग कर दिया है और गाजा पट्टी का एडमिनिस्ट्रेशन नेशनल कमेटी को ट्रांसफर करने की घोषणा की।
सिन्हुआ न्यूज एजेंसी के अनुसार, हमास की ओर से संचालित गाजा मीडिया कार्यालय के महानिदेशक इस्माइल थवाब्ता ने मध्य गाजा के देर अल-बलाह में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि गवर्नमेंट इमरजेंसी कमेटी के प्रमुख मोहम्मद अल-फर्रा ने आधिकारिक तौर पर अपना इस्तीफा दे दिया है।
इस्माइल ने कहा कि प्रशासनिक और तकनीकी कामकाज में कोई रुकावट न आए, इसलिए सिर्फ तकनीकी और पेशेवर कर्मचारी ही अपने पदों पर बने रहेंगे। यह फैसला काहिरा में फिलिस्तीनी गुटों के बीच तय हुए रोडमैप के अनुसार लिया गया है।
उन्होंने कहा कि यह कदम लोगों की मुश्किलें कम करने के लिए उठाया गया है। ये मुश्किलें लगातार जारी युद्ध, पुनर्निर्माण में देरी, घेराबंदी जारी रहने, सीमा पार के रास्ते बंद रहने और इजरायली सेना के पीछे न हटने की वजह से पैदा हुई हैं।
इस्माइल ने सभी संबंधित पक्षों से अपील की कि गाजा के प्रशासन के लिए बनाई गई नेशनल कमेटी को जल्द से जल्द गाजा आने और अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालने की प्रक्रिया पूरी की जाए।
एक अलग बयान में हमास के प्रवक्ता हाजेम कासिम ने कहा कि इस फैसले का मकसद इजरायल के हस्तक्षेप के बहानों को खत्म करना है। उन्होंने यह भी दोहराया कि हमास गाजा के शासन से जुड़ी सभी जिम्मेदारियां सौंपने के लिए प्रतिबद्ध है।
जून के मध्य में फिलिस्तीनी गुटों ने काहिरा में मध्यस्थों से मुलाकात की थी और गाजा युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण के रोडमैप पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी।
अमेरिका के नेतृत्व में बनाए गए 'बोर्ड ऑफ पीस' ने गाजा के भविष्य के लिए एक रोडमैप तैयार किया है। इसमें गाजा के पुनर्निर्माण, हथियारों को हटाने, इजरायली सेना की वापसी और एक अंतरराष्ट्रीय शांति सेना की तैनाती जैसी व्यवस्थाओं का प्रस्ताव शामिल है।
'बोर्ड ऑफ पीस' की शुरुआत फरवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की थी। यह दुनिया के नेताओं के लिए बनाया गया एक नया मंच है, जिसकी बैठक अमेरिकी इंस्टीट्यूट ऑफ पीस में होती है। ट्रंप ने गाजा में युद्ध के बाद स्थिरता और राहत कार्यों के लिए अमेरिका की ओर से 10 अरब डॉलर के योगदान की घोषणा भी की थी।
ट्रंप ने यह भी बताया कि कई देशों ने इस राहत पैकेज के लिए योगदान दिया है। उन्होंने कहा, "मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि कजाकिस्तान, अजरबैजान, यूएई, मोरक्को, बहरीन, कतर, सऊदी अरब, उज्बेकिस्तान और कुवैत ने राहत पैकेज के लिए मिलकर सात अरब डॉलर से ज्यादा का योगदान दिया है।"



