उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार को होली का पर्व अपार उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। तड़के 4 बजे होने वाली विशेष भस्मारती के दौरान पूरा मंदिर परिसर भक्ति और रंगों के सराबोर नजर आया। परंपरा अनुसार, सबसे पहले भगवान महाकाल को हर्बल गुलाल अर्पित किया गया, जिसके बाद पुजारी-पुरोहितों ने बाबा के साथ जमकर होली खेली।


होली के इस विशेष अवसर पर भगवान शिव के पूरे परिवार—माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय को भी गुलाल अर्पित कर पर्व की शुरुआत की गई। भगवान महाकाल का पहले 'हरि ओम' जल से अभिषेक हुआ, तत्पश्चात दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से दिव्य पूजन संपन्न किया गया। भगवान ने इस अवसर पर शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाला और रुद्राक्ष की माला धारण की। सुगंधित पुष्पों की मालाओं से बाबा का मनोहारी श्रृंगार किया गया। इसके बाद बाबा को भांग, फल और मिठाई का महाभोग लगाया गया। नंदी हॉल में भी नंदी जी का विशेष स्नान, ध्यान और पूजन किया गया।


चंद्र ग्रहण का प्रभाव: पट खुले रहेंगे, पर भोग में बदलाव

आज धुलेंडी पर्व के साथ चंद्र ग्रहण का संयोग होने के कारण कई स्थानों पर असमंजस की स्थिति रही, लेकिन उज्जैन सहित मालवा-निमाड़ के कई जिलों में आज ही होली मनाई जा रही है। 3 मार्च को शाम 6:32 से 6:46 बजे तक रहने वाले चंद्र ग्रहण का वेध काल सूर्योदय से ही प्रारंभ हो गया है।


ग्रहण को लेकर मंदिर की विशेष व्यवस्थाएं:

पट नहीं होंगे बंद: महाकाल मंदिर में ग्रहण के दौरान भी श्रद्धालुओं के लिए दर्शन खुले रहेंगे।

शकर का भोग: वेध काल के कारण सुबह की दद्योदक और भोग आरती में भगवान को केवल शकर (चीनी) का भोग अर्पित किया गया।

शुद्धिकरण: शाम 6:46 बजे ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे मंदिर परिसर का शुद्धिकरण किया जाएगा। भगवान का पुनः स्नान और पूजन होगा, जिसके बाद ही विधिवत महाभोग अर्पित कर संध्या आरती की जाएगी।


महाकाल पर क्यों नहीं होता ग्रहण का असर?

मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि भगवान महाकाल 'कालों के काल' हैं। काल की दिशा दक्षिण मानी जाती है और महाकाल का मुख दक्षिण की ओर है, जिससे वे स्वयं काल और समस्त ग्रह-नक्षत्रों पर नियंत्रण रखते हैं। यही कारण है कि कोई भी ग्रहण बाबा महाकाल को प्रभावित नहीं कर सकता। हालांकि, मर्यादा अनुरूप ग्रहण के दौरान पुजारी और श्रद्धालु भगवान का स्पर्श नहीं करेंगे और मंत्रोच्चार के साथ आराधना की जाएगी।


4 मार्च से बदलेगी दिनचर्या: अब ठंडे जल से स्नान

होली के अगले दिन यानी 4 मार्च (चैत्र कृष्ण प्रतिपदा) से भगवान महाकाल की दिनचर्या में ऋतु परिवर्तन के अनुसार बदलाव आएगा। गर्मी की शुरुआत को देखते हुए अब भगवान को गरम के बजाय ठंडे जल से स्नान कराया जाएगा। यह व्यवस्था शरद पूर्णिमा तक प्रभावी रहेगी। इसी के साथ प्रतिदिन होने वाली 5 आरतियों में से 3 के समय में भी आंशिक परिवर्तन किया जाएगा।