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वायु दोष के असंतुलन में असरदार गरुड़ मुद्रा, मूड स्विंग्स और चिड़चिड़ापन होता है कम

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5 फ़रवरी 2026, 03:30 am IST
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बदलती जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या और बढ़ता मानसिक दबाव आज लोगों की सेहत पर सीधा असर डाल रहे हैं। कम उम्र में ही थकान, सुस्ती, चिड़चिड़ापन, सांस लेने में दिक्कत और रक्त संचार से जुड़ी शिकायतें आम होती जा रही हैं।


आयुष मंत्रालय के अनुसार, ऐसी कई समस्याएं शरीर में ऊर्जा के असंतुलन के कारण पैदा होती हैं। ऐसे में सेहत को बेहतर बनाने में योग और हस्त मुद्राएं जैसी विधियां अहम भूमिका निभा सकती हैं। इन्हीं आसान योग अभ्यासों में से एक है गरुड़ मुद्रा, जिसका संबंध वायु तत्व से माना जाता है।


आयुष मंत्रालय के अनुसार, जब शरीर में वायु तत्व असंतुलित हो जाता है, तो व्यक्ति सुस्त रहने लगता है, जल्दी थक जाता है, और उसका मन भी अस्थिर रहने लगता है। गरुड़ मुद्रा इस वायु तत्व को संतुलित करने का काम करती है। इसका नियमित अभ्यास शरीर की सक्रियता बढ़ाने में मदद करता है।


जो लोग ऑफिस में दिनभर बैठकर काम करते हैं, उनके लिए यह मुद्रा लाभकारी है। यह शरीर में रक्त संचार को बेहतर करती है, जिससे हाथ-पैरों में ठंडक, सुन्नपन और कमजोरी की समस्या से राहत मिलती है। बेहतर रक्त प्रवाह से शरीर के अंगों तक पोषण सही तरीके से पहुंचता है, जिससे व्यक्ति खुद को अधिक चुस्त महसूस करता है।


महिलाओं की सेहत के मामले में भी गरुड़ मुद्रा को काफी उपयोगी माना गया है। यह मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द और ऐंठन में राहत देने में मदद करता है। इसका अभ्यास करने से ऊर्जा का संतुलन बना रहता है, जिससे असहजता कम होती है। इसके अलावा, यह मुद्रा सांस से जुड़ी हल्की समस्याओं में भी लाभ पहुंचाता है।


मानसिक स्वास्थ्य पर भी गरुड़ मुद्रा का सकारात्मक असर होता है। जिन लोगों का मूड बार-बार बदलता रहता है, जल्दी गुस्सा हो जाते हैं या अंदर से बेचैनी महसूस करते हैं, उनके लिए यह मुद्रा मददगार साबित हो सकती है। इसका नियमित अभ्यास मन को स्थिर करता है, डर को कम करता है और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करता है। इससे व्यक्ति अधिक संतुलित और अनुशासित महसूस करता है।


आयुष मंत्रालय के अनुसार, गरुड़ मुद्रा के लिए सुबह का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि उस समय मन शांत रहता है और एकाग्रता आसान होती है। रोजाना करीब 20 से 30 मिनट का अभ्यास पर्याप्त माना जाता है।


गरुड़ मुद्रा का अभ्यास करने के लिए पहले किसी भी आरामदायक स्थिति में बैठ जाएं। रीढ़ और गर्दन सीधी रखें। दोनों हथेलियों को ऊपर की ओर लाएं और अब दाहिने हाथ को बाएं हाथ के ऊपर रखकर अंगूठों को फंसा लें। इस दौरान आंखें बंद कर लें और सांस को सामान्य रखते हुए ध्यान केंद्रित करें। इस स्थिति में मन और मस्तिष्क को शांति मिलती है।

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