नई दिल्ली। बच्चों की अच्छी सेहत और सही विकास के लिए फल और सब्जियां बहुत जरूरी हैं। छोटी उम्र में बच्चे जो खाना सीखते हैं, उसका असर उनकी आगे की खाने की आदतों पर भी पड़ता है। इसलिए शुरुआत से ही बच्चों को अलग-अलग तरह की सब्जियां और फल खिलाने की कोशिश करनी चाहिए।

बच्चों के लिए फल और सब्जियां तैयार करते समय उन्हें छोटे और आसानी से खाने लायक टुकड़ों में काटना अच्छा रहता है। इन्हें छोटे-छोटे कंटेनर में पहले से तैयार करके रखा जा सकता है, ताकि बच्चे को भूख लगने पर तुरंत हेल्दी स्नैक दिया जा सके। बच्चे को कितनी मात्रा में फल और सब्जियां चाहिए, यह उसकी उम्र और शारीरिक गतिविधि पर निर्भर करता है। सामान्य तौर पर 12 से 23 महीने के बच्चों को रोजाना करीब एक सर्विंग (करीब 75-100 ग्राम) फल और लगभग सवा सर्विंग (तीन चौथाई कप) सब्जियों की जरूरत हो सकती है। वहीं 2 से 4 साल की उम्र में करीब एक से डेढ़ सर्विंग (एक से डेढ़ कप कटे हुए) फल और लगभग सवा से पौने दो सर्विंग सब्जियां दी जा सकती हैं।

बच्चों की प्लेट को जितना रंग-बिरंगा बनाया जाए, उतना ही उन्हें अलग-अलग खाद्य पदार्थ आजमाने में रुचि हो सकती है। इसे आप रेनबो प्लेट की तरह बना सकते हैं। बच्चों की प्लेट में गाजर, मटर, पालक, शकरकंद और चुकंदर जैसी सब्जियां शामिल की जा सकती हैं। फलों में केला, स्ट्रॉबेरी, नाशपाती, संतरा, खरबूजा और एवोकाडो जैसे विकल्प दिए जा सकते हैं, हालांकि सिर्फ फल और सब्जियां ही पर्याप्त नहीं हैं। बच्चों की डाइट में प्रोटीन, डेयरी और साबुत अनाज जैसे दूसरे पोषक खाद्य पदार्थ भी शामिल होने चाहिए।

जब बच्चा करीब 6 महीने का हो जाए, तब आमतौर पर मां के दूध या शिशु फॉर्मूला के साथ दूसरे खाद्य पदार्थों की शुरुआत की जा सकती है। इन्हें कॉम्प्लिमेंटरी फूड कहा जाता है। ज्यादातर बच्चों के लिए अलग-अलग खाद्य पदार्थ शुरू करने का कोई निश्चित क्रम जरूरी नहीं होता। करीब 7 से 8 महीने की उम्र तक बच्चे कई अलग-अलग फूड ग्रुप के खाद्य पदार्थ खाने की आदत विकसित कर सकते हैं। इस दौरान बच्चे को अलग-अलग पोषक तत्व देना जरूरी है, क्योंकि शरीर और दिमाग के विकास के लिए कई तरह के विटामिन और मिनरल्स की जरूरत होती है।

बच्चे जैसे-जैसे बड़े होते हैं, उन्हें नए-नए खाद्य पदार्थों से परिचित कराते रहना चाहिए। एक से दो साल की उम्र के बीच बच्चे धीरे-धीरे परिवार के साथ खाना खाने की आदत विकसित करने लगते हैं। करीब 2 साल की उम्र तक कई बच्चे परिवार के बाकी सदस्यों जैसा खाना खाने में सक्षम हो जाते हैं, बशर्ते भोजन उनकी उम्र के हिसाब से सुरक्षित और उचित तरीके से तैयार किया गया हो।

इस उम्र में बच्चों का नखरा करना भी सामान्य है। हो सकता है बच्चा कल तक पसंद किया हुआ खाना आज खाने से मना कर दे। कुछ बच्चे सिर्फ दो-तीन चीजें खाना पसंद करते हैं। ऐसे व्यवहार अक्सर उम्र के साथ कम हो जाते हैं। इसलिए बच्चा पहली बार कोई फल या सब्जी न खाए तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। उसे कुछ समय बाद वही चीज दोबारा दी जा सकती है। कई बच्चों को किसी नए स्वाद को पसंद करने से पहले उसे कई बार चखना पड़ता है।

पेय पदार्थों पर भी ध्यान देना जरूरी है। 6 से 12 महीने की उम्र में बच्चे को थोड़ी मात्रा में पानी दिया जा सकता है। 12 महीने के बाद डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार पाश्चराइज्ड गाय का दूध, कम लैक्टोज या लैक्टोज-फ्री दूध और बिना अतिरिक्त चीनी वाले फोर्टिफाइड डेयरी विकल्प दिए जा सकते हैं। पानी और बिना चीनी वाले पेय बच्चों के लिए बेहतर विकल्प हैं।

सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चे वही आदतें जल्दी सीखते हैं जो वे घर में देखते हैं। अगर माता-पिता खुद फल, सब्जियां, साबुत अनाज, प्रोटीन और पौष्टिक भोजन खाते हैं, तो बच्चे भी इन्हें अपनाने की संभावना रखते हैं। इसलिए बच्चे को सिर्फ हेल्दी खाने के लिए कहना काफी नहीं है, बल्कि खुद भी उसका उदाहरण बनना जरूरी है।