छतरपुर । समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाने और दूसरों को नया जीवन देने के उद्देश्य से सागर रोड बगौता निवासी सुनील तिवारी एवं उनकी धर्मपत्नी प्रेक्षा तिवारी ने एक अनुकरणीय पहल की है। इस दंपत्ति ने मरणोपरांत अपने शरीर के अंगों को दान करने की आधिकारिक घोषणा की है, जिसमें लीवर, किडनी, हार्ट, लंग्स, पेनक्रियाज, हार्ट बाल्व,आँखें सहित अन्य अंग शामिल है। इसके लिए उन्होंने भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा संचालित पोर्टल पर अपना पंजीकरण पूर्ण कर लिया है।
पूरे परिवार का मिला समर्थन
इस नेक निर्णय की विशेष बात यह रही कि तिवारी दंपत्ति की एकमात्र पुत्री अनामिका ने भी सहर्ष अपने माता-पिता के इस निर्णय का समर्थन करते हुए अपनी लिखित सहमति प्रदान की है। एक ओर जहाँ अंगदान को लेकर समाज में कई भ्रांतियां हैं, वहीं एक ही परिवार के सभी सदस्यों का इस दिशा में एकजुट होना मानवता के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
अंगदान से बच सकती हैं कई जानें
सुनील तिवारी एवं प्रेक्षा तिवारी ने इस अवसर पर कहा कि चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में अंगदान एक महादान है। मृत्यु के पश्चात हमारा शरीर पंचतत्व में विलीन हो जाता है, लेकिन यदि हमारे अंगों से किसी की दुनिया रोशन हो सके या किसी को जीवनदान मिल सके, तो यह सबसे बड़ा पुण्य है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया बहुत सुगम है और हर नागरिक को इस मुहिम से जुड़ना चाहिए।
क्षेत्र में हो रही सराहना
तिवारी परिवार के इस साहसिक और परोपकारी निर्णय की क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों और सामाजिक संस्थाओं ने मुक्त कंठ से सराहना की है। सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप सेन का मानना है कि इस तरह की पहल से समाज के अन्य वर्गों में भी अंगदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होगी।
सुनील तिवारी और उनके परिवार का यह निर्णय अत्यंत प्रेरणादायक है। एक पूरे परिवार का इस पुनीत कार्य के लिए आगे आना समाज में जागरूकता फैलाने के लिए एक सशक्त उदाहरण है।

