कोलकाता। पूर्वी रेलवे के आरपीएफ ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए पैसेंजर ट्रेन में दिव्यांगजन (दिव्यांग अनुकूल) कोच में लगी आग के रहस्य को सुलझा लिया है। यह घटना 21 जून को ट्रेन संख्या 53434 डाउन (बरहरवा–अजीमगंज पैसेंजर) में हुई थी।

जानकारी के अनुसार, बरहरवा स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 से ट्रेन के रवाना होने के कुछ ही मिनट बाद यात्रियों ने चेन खींच दी थी। इसके बाद ट्रेन को रोकना पड़ा और कोच में धुएं की सूचना मिलने से अफरा-तफरी मच गई।

ड्यूटी पर मौजूद आरपीएफ कांस्टेबल मृत्युंजय कुमार, सब-इंस्पेक्टर लाल बहादुर माझी और कांस्टेबल अनिल कुमार तुरंत मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान दिव्यांगजन कोच के शौचालय में पश्चिमी शैली के टॉयलेट पैन का फाइबर ढक्कन जलता हुआ मिला। मौके पर न तो कागज मिला और न ही किसी तरह का ज्वलनशील पदार्थ, जिससे मामला और संदिग्ध हो गया।

बरहरवा आरपीएफ पोस्ट ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ रेलवे अधिनियम की धारा 153 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। इसके बाद आरपीएफ टीम ने बरहरवा और साहिबगंज स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच की। फुटेज से संदिग्ध की पहचान उसके कपड़ों और चाल-ढाल के आधार पर की गई।

पूर्वी रेलवे के महाप्रबंधक मिलिंद देउस्कर के मार्गदर्शन में आरपीएफ टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर जाल बिछाया और 29 जून को साहिबगंज स्टेशन पर उसी ट्रेन में संदिग्ध को पकड़ लिया।

पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने कोच में सिगरेट/बीड़ी पी और उसे बुझाने के प्रयास में टॉयलेट के प्लास्टिक ढक्कन पर रगड़ दिया, जिससे आग लग गई। घबराकर वह धीमी गति से चलती ट्रेन से कूदकर फरार हो गया था।

आरोपी को साहिबगंज की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 24 जुलाई 2026 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

पूर्वी रेलवे के अधिकारियों ने इस त्वरित कार्रवाई की सराहना की है। आईजी सह प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त अमिया नंदन सिन्हा ने आरपीएफ टीम की सतर्कता और तकनीकी जांच की प्रशंसा की।