नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शनिवार को महानदी अपतटीय (ऑफशोर) बेसिन में पहले अप्रेजल वेल की ड्रिलिंग शुरू होने की घोषणा करते हुए इसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में "एक नए अध्याय की शुरुआत" बताया।केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि इस पहले अप्रेजल वेल की ड्रिलिंग की शुरुआत पिछले एक दशक में किए गए दूरदर्शी सुधारों का परिणाम है, जिन्होंने भारत के एक्सप्लोरेशन एंड प्रोडक्शन क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया है।

महानदी ऑफशोर बेसिन में शुरू किया गया 'एमएन-डीडब्ल्यूएन18-1-एचडी' अप्रेजल वेल चार प्रस्तावित डीपवॉटर वेल में पहला है। इन कुओं के जरिए देश के सबसे संभावनाशील ऑफशोर बेसिन में से एक का चरणबद्ध तरीके से आकलन किया जाएगा।

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, इस ड्रिलिंग कार्यक्रम में विश्वस्तरीय डीपवॉटर ड्रिलिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे नए हाइड्रोकार्बन संसाधनों की खोज करने और देश की घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

मंत्री ने कहा कि पिछले दस वर्षों में सरकार ने ऐतिहासिक नीतिगत और नियामकीय सुधारों के जरिए एक्सप्लोरेशन एंड प्रोडक्शन क्षेत्र के पूरे ढांचे को बदल दिया है।

हरदीप पुरी ने ओएनजीसी, ऑयल इंडिया लिमिटेड, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हाइड्रोकार्बन्स, तकनीकी साझेदारों और पूरे एक्सप्लोरेशन क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों को बधाई देते हुए विश्वास जताया कि इस ड्रिलिंग की शुरुआत भारत के ऑफशोर एक्सप्लोरेशन को और मजबूत करेगी तथा देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उन्होंने कहा, "आज जब हम इस पहले वेल की ड्रिलिंग शुरू कर रहे हैं, तो हम केवल समुद्र की तलहटी में ड्रिलिंग नहीं कर रहे, बल्कि भारत की भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा की नींव मजबूत कर रहे हैं। ड्रिलिंग का हर मीटर हमें आयात पर निर्भरता कम करने, आत्मनिर्भरता बढ़ाने और विकसित भारत के विजन को साकार करने के और करीब ले जाएगा।"

मंत्री ने हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन एंड लाइसेंसिंग पॉलिसी (एचईएलपी) की शुरुआत, नामांकन आधारित व्यवस्था की जगह ओपन एकरेज लाइसेंसिंग प्रोग्राम (ओएएलपी) लागू करने, पारदर्शी रेवेन्यू शेयरिंग व्यवस्था अपनाने और पहले प्रतिबंधित रहे लगभग 99 प्रतिशत ऑफशोर 'नो-गो' क्षेत्रों को एक्सप्लोरेशन के लिए खोलने जैसे प्रमुख सुधारों का भी उल्लेख किया।

हरदीप पुरी ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद भारत के कुल सक्रिय एक्सप्लोरेशन एकरेज का लगभग 81 प्रतिशत आवंटित किया गया है, जो इन सुधारों के कारण निवेशकों और एक्सप्लोरेशन कंपनियों के बढ़े भरोसे को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि ओएएलपी के तहत अब तक लगभग 3.8 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले 172 एक्सप्लोरेशन ब्लॉक आवंटित किए जा चुके हैं, जिनमें 4.3 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता मिली है।

मंत्री के अनुसार, केवल वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ही लगभग 674 वेल की ड्रिलिंग की गई, 5 नई खोजें हुईं और 7 खोजों का व्यावसायिक दोहन शुरू किया गया।