जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी और सीजेपी के नेतृत्व में लाखों छात्रों द्वारा बार-बार पेपर लीक के मामले में जवाबदेही की मांग को लेकर चलाए गए निरंतर संघर्ष की जीत बताया।

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए गहलोत ने कहा कि आज राहुल गांधी और लाखों छात्रों द्वारा पेपर लीक के खिलाफ चलाए गए संघर्ष की जीत हुई है। इस आंदोलन ने देश की शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की, ऐसे समय में जब मोदी सरकार बार-बार जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही थी।

जनता के भारी दबाव के कारण अंततः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। प्रधानमंत्री ने लंबे समय तक उनका बचाव किया, लेकिन अब वे जनता की जवाबदेही की मांग से उन्हें बचा नहीं सकते थे।

राहुल गांधी के आज सुबह के बयान का जिक्र करते हुए गहलोत ने कहा कि आज सुबह राहुल गांधी ने स्पष्ट रूप से कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटा देना चाहिए। छात्रों और उनकी आकांक्षाओं के प्रति उनके अटूट समर्थन ने इस आंदोलन को मजबूती दी है। यह भारत के लोकतंत्र की शक्ति है कि एक निरंकुश सरकार जनता की आवाज के आगे झुकने को विवश हुई।

गहलोत ने छात्र विरोध प्रदर्शनों पर सरकार की प्रतिक्रिया को भी याद किया।

उन्होंने कहा कि देश अखबार लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ हुए बर्बर व्यवहार को नहीं भूला है, जिसमें पेलेट गन और आंसू गैस का इस्तेमाल शामिल है। न ही देश राहुल गांधी के साथ छात्रों के समर्थन में खड़े होने के दौरान हुई बदसलूकी को भूला है। ये घटनाएं लोकतांत्रिक असहमति को दबाने के सरकार के प्रयास की याद दिलाती हैं।

अपने बयान का समापन करते हुए गहलोत ने कहा कि आज लोकतंत्र की जीत हुई है और तानाशाही की हार हुई है। हालांकि, यह संघर्ष का अंत नहीं है। भारत की जनता उस सरकार को कभी माफ नहीं करेगी जिसने लाखों युवा छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया। हमारा संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक हर छात्र को न्याय नहीं मिल जाता, दोषियों को सजा नहीं मिल जाती और भारत की शिक्षा प्रणाली की गरिमा पूरी तरह बहाल नहीं हो जाती।