ग्लासगो। भारतीय लॉन्ग जंपर मुरली श्रीशंकर ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार शुरुआत की है। उन्होंने सोमवार को पुरुषों की लॉन्ग जंप के क्वालिफिकेशन राउंड में 8.01 मीटर की छलांग लगाकर फाइनल के लिए क्वालीफाई किया। श्रीशंकर ने ऑटोमैटिक क्वालिफिकेशन मार्क को आसानी से पार कर लिया।

क्वालीफाइंग 'ग्रुप-ए' में 27 वर्षीय एथलीट को फाइनल में सीधा प्रवेश पाने के लिए कम से कम 8.00 मीटर की छलांग लगाने की जरूरत थी। श्रीशंकर ने यह लक्ष्य केवल एक प्रयास में हासिल कर लिया, जिसके बाद उन्होंने अपना क्वालिफिकेशन राउंड समाप्त कर दिया और बुधवार को होने वाले मेडल इवेंट के लिए अपनी ऊर्जा बचाकर रखी।

केरल के इस एथलीट ने अपने पहले प्रयास से ही 'ग्रुप-ए' में शीर्ष स्थान हासिल किया। वे जमैका के जॉर्डन टर्नर से आगे रहे, जिनकी सर्वश्रेष्ठ छलांग 7.80 मीटर थी। अगर श्रीशंकर क्वालिफिकेशन मानक तक नहीं पहुंच पाते, तो उन्हें आगे बढ़ने के लिए दोनों क्वालिफिकेशन ग्रुप के 12 सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वालों में शामिल होना पड़ता।

इसके बजाय, भारतीय एथलीट ने शुरुआत से ही अपने इरादे स्पष्ट कर दिए और अपनी पहली छलांग से ही जरूरी मार्क को आसानी से पार करके किसी भी तरह की अनिश्चितता को दूर कर दिया।

चोट से उबरकर इस सीजन में शानदार फॉर्म में वापसी करने वाले श्रीशंकर, भारत के लिए एथलेटिक्स में मेडल जीतने की सबसे मजबूत उम्मीदों में से एक के तौर पर ग्लासगो पहुंचे हैं। उनके नाम इस सीजन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (8.38 मीटर) दर्ज है।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में श्रीशंकर ने क्वालिफिकेशन राउंड में दबदबा बनाया था और सभी प्रतिस्पर्धियों में सर्वश्रेष्ठ छलांग (8.05 मीटर) लगाई थी, लेकिन फाइनल में मामूली अंतर से गोल्ड मेडल से चूक गए थे। उन्होंने 8.08 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाई थी, जो बहामास के लाक्वान नायरन के बराबर थी। नायरन ने अपनी दूसरी सर्वश्रेष्ठ छलांग बेहतर होने के कारण 'काउंटबैक नियम' के तहत गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। अब श्रीशंकर 29 जुलाई को फाइनल खेलेंगे, जिसमें उनके पास चार साल पहले बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में जीते गए सिल्वर मेडल का रंग बदलने को मौका है।