नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच शनिवार को उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को धरना स्थल से हटाकर अस्पताल ले जाया गया। इस घटनाक्रम के बाद 'कॉकरोच जनता पार्टी' के फाउंडर अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। दीपके ने दावा किया कि सोनम वांगचुक को जबरन ले जाने के दौरान विरोध स्थल पर पुलिस ने न केवल उनके साथ मारपीट की और उन्हें हिरासत में लिया, बल्कि अनशन पर बैठे वांगचुक को भी पुलिस घसीटते हुए और गाली-गलौज करते हुए अपने साथ ले गई। अभिजीत दीपके ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि जैसे ही उन्हें सोनम वांगचुक को उठाए जाने की खबर मिली, वे तुरंत जंतर-मंतर के लिए रवाना हुए। लेकिन रास्ते में ही पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक लिया, उनके साथ मारपीट की और घसीटते हुए एक गेट के पीछे बंद कर दिया। दीपके के अनुसार, पुलिस ने उन्हें चुनौती देते हुए कहा कि देखते हैं तुम जंतर-मंतर कैसे पहुंचते हो। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने पुलिसिया कार्रवाई का विरोध करते हुए चिल्लाने का प्रयास किया, तो पुलिसकर्मियों ने जबरन उनका मुंह दबा दिया।


दिल्ली पुलिस पर बरसे दीपके: "ये पुलिस नहीं, आरएसएस के गुंडे हैं"

घटना से आक्रोशित अभिजीत दीपके ने पुलिस की इस कार्रवाई पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर मौजूद अन्य छात्रों के साथ भी बर्बरतापूर्वक मारपीट की गई है। दीपके ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि यह दिल्ली पुलिस नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के गुंडे हैं, जो 60 साल के एक बुजुर्ग इंसान को, जो पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठा था, इस तरह घसीटकर ले गए हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि वे विदेश से अपने देश वापस लौटे हैं, कोई अपराधी नहीं हैं, फिर भी उनके साथ सड़कों पर सरेआम अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया। दीपके ने यह भी चिंता व्यक्त की कि सोनम वांगचुक को पुलिस किस अज्ञात स्थान पर ले गई है, इस बात की कोई भी आधिकारिक जानकारी उनके समर्थकों को नहीं दी गई है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को देश में तानाशाही का प्रतीक बताया।


आंदोलन तेज करने की चेतावनी: "20 जुलाई को करेंगे संसद मार्च, अब पीएम के इस्तीफे की मांग"

इस पूरे विवाद के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर ने सीधे देश के प्रधानमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आज की घटना से यह पूरी तरह साफ हो गया है कि नरेंद्र मोदी एक तानाशाह हैं और दिल्ली पुलिस उनकी इसी गुंडागर्दी को आगे बढ़ा रही है। दीपके ने देश की जनता से अपील की कि वे इस तानाशाही के खिलाफ उठ खड़े हों और सोनम वांगचुक के समर्थन में देश भर में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का आयोजन करें। उन्होंने सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि अगर प्रशासन को लगता है कि सोनम वांगचुक को धरना स्थल से हटाने मात्र से यह आंदोलन दम तोड़ देगा, तो यह उनकी बड़ी गलतफहमी है। दीपके ने एलान किया कि सभी प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर ही डटे रहेंगे और पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 20 जुलाई को संसद तक मार्च करेंगे। उन्होंने आगे जोड़ा कि अब तक वे केवल शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे, लेकिन शनिवार को हुए इस घृणित कृत्य के बाद अब सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग की जाएगी।


20 दिनों से भूख हड़ताल पर थे वांगचुक: पुलिस ने दी कोर्ट के आदेशों की दलील

गौरतलब है कि प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 20 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए थे। शनिवार की सुबह पुलिस और प्रशासन की टीम भारी बल के साथ विरोध स्थल पर पहुंची और उन्हें वहां से हटाकर सफदरजंग अस्पताल ले गई। पुलिस की इस अचानक हुई कार्रवाई के कारण जंतर-मंतर पर कुछ समय के लिए भारी अफरा-तफरी और तनाव की स्थिति निर्मित हो गई, क्योंकि वहां मौजूद वांगचुक के तमाम समर्थकों ने पुलिस वाहनों को रोकने और उन्हें ले जाने से बचाने का पुरजोर प्रयास किया। हालांकि, इस पूरे मामले पर दिल्ली पुलिस ने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई किसी दुर्भावना के तहत नहीं, बल्कि माननीय दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा जारी किए गए आवश्यक निर्देशों के अनुपालन के तहत की गई थी।