नई दिल्ली। बॉलीवुड के जाने-माने कॉमेडियन और अभिनेता राजपाल यादव लंबे समय से चल रहे चेक बाउंस मामले में तिहाड़ जेल में बंद हैं। उनकी जमानत याचिका पर गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, लेकिन कोर्ट ने उन्हें राहत देने से साफ इनकार कर दिया। अदालत ने मुरली प्रोजेक्ट कंपनी को नोटिस जारी किया।
अभिनेता राजपाल यादव ने शाहजहांपुर जाकर अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए जमानत की अपील की है, लेकिन कोर्ट ने अभी इस पर अंतिम निर्णय नहीं दिया है।राजपाल यादव के वकील भाष्कर उपाध्याय ने बताया कि जमानत की सुनवाई को फिलहाल टालने का कारण यह है कि उन्हें दूसरी पार्टी को जवाब देना है।
वकील ने कहा कि जेल में जाकर राजपाल यादव से मिलने के बाद ही वे भुगतान संबंधी निर्देश प्राप्त करेंगे। जो पैसा पांच करोड़ रुपए की इन्वेस्टमेंट के रूप में लगाया गया था, उसे देने से अभिनेता ने कभी इनकार नहीं किया। पहले भी जब भुगतान की चर्चा हुई थी, तब कंपनी ने पैसे लेने से मना किया था।
भाष्कर उपाध्याय ने बताया कि 2012 के एग्रीमेंट के आधार पर मामला चल रहा है। इस दौरान राजपाल यादव ने पहले से ही तीन महीने की सजा काट ली है। राजपाल यादव को पैसे किसने दिए? इसके बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता, क्योंकि यह पारिवारिक मामला है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल पांच करोड़ में से ढाई करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है और सोमवार को कोर्ट में इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
दरअसल, राजपाल यादव ने 2010 में अपनी डायरेक्टोरियल फिल्म 'अता-पता लापता' बनाने के लिए मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग पांच करोड़ रुपए का लोन लिया था। फिल्म आर्थिक रूप से सफल नहीं हुई, जिससे भुगतान में देरी हुई और कई चेक बाउंस हो गए। इसके बाद नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया। दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें कई अवसर दिए, लेकिन बार-बार भुगतान न करने के कारण अदालत ने उन्हें नोटिस जारी किया और 4 फरवरी को आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था।

