सतना, अंबिका केशरी। जिले के रामपुर बघेलान विकासखंड में पदस्थ 61 वर्षीय शिक्षिका ने विद्यालय तक पहुंचने में हो रही गंभीर परेशानी को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) से मानवीय आधार पर राहत की मांग की है। शिक्षिका का कहना है कि विद्यालय तक पहुंचने के लिए जंगल के बीच स्थित कच्ची पगडंडी ही एकमात्र रास्ता है, जो बरसात में पूरी तरह कीचड़ और पानी से भर जाता है। ऐसे में विद्यालय पहुंचना उनके लिए शारीरिक रूप से अत्यंत कठिन हो गया है।
जानकारी के अनुसार, संकुल केंद्र सज्जनपुर के अंतर्गत प्राथमिक शाला नई बस्ती-मतरी में पदस्थ शिक्षिका मणि सिंह बघेल ने डीईओ को लिखित आवेदन सौंपकर बताया कि विद्यालय एवं आसपास की बस्ती संरक्षित वन क्षेत्र में स्थित है। वन भूमि होने के कारण वहां सड़क निर्माण की अनुमति नहीं है, जिससे वर्षों से आवागमन की समस्या बनी हुई है।
शिक्षिका ने आवेदन में उल्लेख किया है कि मुख्य सड़क से विद्यालय की दूरी लगभग डेढ़ किलोमीटर है। इस दूरी को तय करने के लिए केवल एक कच्ची पगडंडी उपलब्ध है, जो बारिश के दौरान पूरी तरह दलदल में बदल जाती है। इससे न केवल शिक्षकों और विद्यार्थियों, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
61 वर्षीय शिक्षिका ने जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला शिक्षा केंद्र कार्यालय पहुंचकर आगामी तीन माह के वर्षाकाल के लिए किसी ऐसे विद्यालय में अस्थायी संलग्नीकरण की मांग की है, जहां आवागमन की समुचित व्यवस्था हो। उन्होंने अपनी आयु और स्वास्थ्य का हवाला देते हुए मानवीय आधार पर शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया है।
यह मामला एक बार फिर वन भूमि और राजस्व भूमि के बीच फंसे विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति को सामने लाता है। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग बुजुर्ग शिक्षिका की समस्या को गंभीरता से लेते हुए उन्हें राहत प्रदान करता है या नहीं।




