भोपाल | मध्य प्रदेश की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य में होने वाले राज्यसभा चुनाव का सस्पेंस अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तीनों उम्मीदवारों— राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ, प्रदेश महामंत्री रजनीश अग्रवाल और ओरछा के जमीनी कार्यकर्ता महेश केवट को निर्विरोध (Unopposed) राज्यसभा सांसद चुन लिया गया है। विधानसभा परिसर में रिटर्निंग ऑफिसर ने तीनों नवनिर्वाचित सांसदों को जीत का आधिकारिक प्रमाण पत्र (Certificate of Election) सौंप दिया है।


कांग्रेस के कदम पीछे खींचते ही साफ हुआ रास्ता

गौरतलब है कि भाजपा द्वारा तीसरी सीट पर महेश केवट को उतारने के बाद से ही मुकाबला बेहद दिलचस्प और कांटे का हो गया था। कांग्रेस ने विधायकों को एकजुट रखने और क्रॉस-वोटिंग से बचाने के लिए उन्हें बेंगलुरु भेजने तक की तैयारी कर ली थी। परंतु, अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, संख्या बल के अभाव और पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को देखते हुए कांग्रेस आलाकमान ने ऐन वक्त पर अपनी रणनीति बदली। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन द्वारा नामांकन वापस लिए जाने (या तकनीकी रूप से मैदान से हटने) के बाद भाजपा के तीनों दिग्गजों के निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया।


बीजेपी खेमे में जश्न, सीएम और प्रदेश अध्यक्ष ने दी बधाई

तीनों प्रत्याशियों के निर्विरोध चुने जाने की खबर आते ही भाजपा प्रदेश कार्यालय और विधानसभा परिसर में जश्न का माहौल है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने नवनिर्वाचित सांसदों को मिठाई खिलाकर बधाई दी।


मुख्यमंत्री ने कहा, "यह देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और भाजपा की अंत्योदय के प्रति प्रतिबद्धता की जीत है। हमारे तीनों साथी उच्च सदन में मध्य प्रदेश की आवाज को मजबूती से बुलंद करेंगे।" इस निर्विरोध निर्वाचन के बाद अब आगामी 18 जून को होने वाले मतदान की जरूरत खत्म हो गई है।