नई दिल्ली। देश की शीर्ष अदालत ने कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थकों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर तत्काल सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया है। बुधवार को जब एक वकील ने देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अगुआई वाली 3 जजों की पीठ के सामने इस याचिका को अति-महत्वपूर्ण बताते हुए तुरंत सुनवाई की गुहार लगाई, तो अदालत ने सख्त रुख अपनाया। पीठ ने याचिकाकर्ता वकील के वीडियो साक्ष्य देखने के अनुरोध को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि कोर्ट का समय बेहद कीमती है।


'हमारे पास वीडियो देखने का समय नहीं, समय बर्बाद मत कीजिए': CJI

अदालत की कार्यवाही के दौरान जब याचिकाकर्ता वकील ने प्रदर्शनकारियों पर हुए पुलिसिया बल प्रयोग का वीडियो देखने का आग्रह किया, तो मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने तल्ख लहजे में कहा, "हमें वीडियो देखने में कोई रुचि नहीं है। हमारे पास उन्हें देखने का समय नहीं है।"


इसके बावजूद जब वकील ने लाठीचार्ज में घायल हुए छात्रों के साथ मारपीट के वीडियो देखने का दोबारा अनुरोध किया, तो CJI ने नाराजगी जताते हुए सख्त टिप्पणी की, "हमारा और अपना समय बिल्कुल बर्बाद मत कीजिए।" अदालत के इस कड़े रुख के बाद तत्काल सुनवाई की याचिका को आगे बढ़ाने से रोक दिया गया।


'कॉकरोच टिप्पणी' के बाद अस्तित्व में आई थी पार्टी, संसद मार्च के दौरान हुआ था बवाल

गौरतलब है कि बीते 15 मई को एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान CJI ने टिप्पणी करते हुए कहा था, "कुछ बेरोजगार युवा कॉकरोच जैसे होते हैं, जो बाद में मीडिया, सोशल मीडिया या RTI एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमला करने लगते हैं।" इस चर्चित टिप्पणी के बाद ही अभिजीत दीपके नामक युवा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के नाम से एक अकाउंट और संगठन बनाया था।


इसी संगठन के बैनर तले 20 जुलाई को दिल्ली में संसद मार्च का आयोजन किया गया था। इस प्रदर्शन के दौरान हजारों की संख्या में उग्र प्रदर्शनकारी संसद भवन की तरफ बढ़ने लगे थे। स्थिति को नियंत्रित करने और भीड़ को रोकने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था। इस दौरान हुए हिंसक टकराव में 100 से भी ज्यादा पुलिसकर्मी और छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए थे।


दिल्ली हाईकोर्ट ने भी त्वरित सुनवाई से किया था इनकार; बोली- 'अदालत को इसमें न घसीटें'

शीर्ष अदालत से पहले मंगलवार को ऐसा ही एक समान मामला दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष भी पहुंचा था। तब दिल्ली हाईकोर्ट ने भी लाठीचार्ज से जुड़ी याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को दोटूक शब्दों में कहा था कि वे ऐसी राजनैतिक और प्रशासनिक घटनाओं में अदालत को न घसीटें और तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करें।


सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने की निंदा; निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

दूसरी तरफ, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने छात्र प्रदर्शन के दौरान निर्दोष युवाओं और छात्रों पर पुलिस द्वारा किए गए इस कथित बर्बर लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा की है। बार एसोसिएशन ने अपना आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि पुलिस की इस कठोर कार्रवाई में कई छात्रों को गंभीर और गहरी चोटें आई हैं। एसोसिएशन ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है ताकि निर्दोषों पर बल प्रयोग करने वाले दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सके।