पटना। बिहार में भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। इस मामले में कांग्रेस ने राज्य सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने मंगलवार को आरोप लगाया कि भरत तिवारी की मुठभेड़ में मौत नहीं हुई, बल्कि उनकी हत्या की गई है।पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि वह इस घटना को एनकाउंटर मानने से इनकार करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे मामले में साजिश की गई और पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।

कांग्रेस सांसद ने कहा, "पहले मैं इस बात को खारिज करता हूं कि भरत तिवारी का एनकाउंटर हुआ, बल्कि उसकी हत्या की गई है। वहां के डीएसपी ने पूरी साजिश रची और उस लड़के की हत्या की।"

उन्होंने कहा कि वह भरत तिवारी के गांव गए थे और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने सरकार से मांग की कि मामले की जांच किसी सेवानिवृत्त जज से नहीं, बल्कि पटना हाई कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश से कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच के लिए ऐसी व्यवस्था जरूरी है, जिससे किसी तरह के दबाव की संभावना न रहे।

अखिलेश प्रसाद सिंह ने पीड़ित परिवार के लिए आर्थिक सहायता की भी मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को तत्काल परिवार को एक करोड़ रुपए की सहायता देने की घोषणा करनी चाहिए, ताकि उन्हें राहत मिल सके।

पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि किसी बड़े अधिकारी या राजनीतिक व्यक्ति को भी किसी की जान लेने का अधिकार नहीं है।

कांग्रेस सांसद ने अपने बयान में मुंबई हमलों के दोषी अजमल कसाब का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कसाब ने आतंकी घटना को अंजाम दिया था, लेकिन उसे भी कानूनी प्रक्रिया के तहत सजा दी गई। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई कानून के दायरे में होनी चाहिए।

बता दें कि भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर बिहार में राजनीतिक बयानबाजी जारी है। विपक्ष लगातार इस मामले की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है, जबकि पुलिस की कार्रवाई और घटना के वास्तविक तथ्यों को लेकर जांच प्रक्रिया जारी है।