इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के अंडरग्राउंड कॉरिडोर निर्माण को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुँच गई हैं। सितंबर माह से सुरंग (टनल) की खुदाई शुरू करने के लिए थाईलैंड से लाई गई अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) के अलग-अलग पार्ट्स को असेंबल किया जा रहा है। यह असेंबलिंग प्रक्रिया इंदौर एयरपोर्ट के सामने प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन के पास चल रही है, जहाँ से मशीन को जमीन के भीतर उतारा जाएगा।
कैसे काम करेगी टनल बोरिंग मशीन (TBM)?
TBM मशीन जमीन से लगभग 20 से 30 मीटर नीचे उतरकर सुरंग की खुदाई करेगी। मशीन के अग्रभाग (फ्रंट) पर लगा एक विशाल गोलाकार कटर हेड लगातार घूमते हुए कठोर चट्टानों और मिट्टी को काटेगा। खुदाई से निकलने वाला मलबा कन्वेयर बेल्ट सिस्टम के जरिए टनल के बाहर निकाला जाएगा। यह मशीन केवल खुदाई ही नहीं करेगी, बल्कि सुरंग की मजबूती के लिए साथ के साथ कंक्रीट के रिंग सेगमेंट (लाइंर्स) भी स्थापित करती जाएगी। विशेषज्ञ टीमों के अनुसार, एक TBM मशीन प्रतिदिन लगभग 20 मीटर तक सुरंग की खुदाई करने में सक्षम है। मेट्रो कॉर्पोरेशन दो TBM मशीनों से एक साथ खुदाई का काम शुरू करने की तैयारी में है।
₹2100 करोड़ का प्रोजेक्ट और सुरक्षा उपाय
एयरपोर्ट से एमजी रोड मॉल के समीप तक लगभग 11 किलोमीटर लंबे अंडरग्राउंड मेट्रो ट्रैक के निर्माण का ठेका करीब ₹2,100 करोड़ की लागत में दिया गया है। टनल की शुरुआती पहुँच और कठोर चट्टानों को तोड़ने के लिए विस्फोटक ब्लास्टिंग की जा रही है। सुरक्षा के मद्देनजर ब्लास्टिंग के दौरान कुछ समय के लिए ऊपरी सतह के ट्रैफिक को रोका जाता है।
इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट के तीन मुख्य चरण
पहला चरण: गांधी नगर से मालवीय नगर स्टेशन (लगभग 17 किमी एलीवेटेड ट्रैक)।
दूसरा चरण: रोबोट चौराहे से खजराना चौराहा।
तीसरा चरण (अंडरग्राउंड): खजराना चौराहे से एयरपोर्ट स्टेशन तक (जिसमें एयरपोर्ट से एमजी रोड का 11 किमी हिस्सा शामिल है)।




