छतरपुर, संजय अवस्थी। छतरपुर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोलती एक डरावनी तस्वीर सामने आई है। मरीजों को आपातकालीन स्थिति में अस्पताल पहुँचाने वाली एम्बुलेंस खुद ही 'बीमार' और जर्जर हाल में हैं। जिला अस्पताल में मरीज लेकर पहुँची एक एम्बुलेंस (नंबर: CG 04 NS 4580) की खस्ताहाल स्थिति देखकर न केवल परिजन दहशत में हैं, बल्कि इसमें ड्यूटी करने वाला स्टाफ भी अपनी जान हथेली पर रखकर सफर कर रहा है।


विस्तृत जानकारी के अनुसार, इस एम्बुलेंस की बॉडी पूरी तरह जर्जर हो चुकी है और सामने का मुख्य कांच (फ्रंट ग्लास) पिछले दो साल से टूटा हुआ है। वाहन की स्थिति इतनी खराब है कि तेज हवा या मामूली झटके से कांच चटककर चालक या अंदर बैठे स्टाफ के चेहरे पर गिर सकता है, जो किसी बड़े हादसे को खुला आमंत्रण है। वाहन में सफर करने वाले मरीजों के परिजनों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें इस 'मौत के रथ' पर सवार होना पड़ता है क्योंकि उनके पास दूसरा कोई विकल्प नहीं होता।


5.30 लाख किलोमीटर का सफर और बेपरवाह जिम्मेदार:

मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब एम्बुलेंस के ईएमटी (EMT) मंगल अहिरवार ने बताया कि यह वाहन लगभग 5 लाख 30 हजार किलोमीटर से अधिक चल चुका है। उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले दो साल से वे इसी तरह टूटे कांच के साथ गाड़ी चला रहे हैं। कई बार उच्च अधिकारियों और संस्था को अवगत कराया गया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।


इस लापरवाही पर जब जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो जिला एम्बुलेंस प्रभारी रोहित अरजरिया ने फोन रिसीव नहीं किया और सीएमएचओ (CMHO) डॉ. आर.के. गुप्ता से भी संपर्क नहीं हो सका। प्रशासन की यह चुप्पी किसी बड़े हादसे का इंतजार करती प्रतीत हो रही है। यदि समय रहते इन कंडम वाहनों को नहीं बदला गया, तो मरीजों की जान बचाने के दावे कागजों तक ही सिमट कर रह जाएंगे।