नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय में एक वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट (वन ईयर पीजी) कोर्स में सीटों की कमी को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत चौथे वर्ष की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों के साथ प्रवेश प्रक्रिया में अन्याय हो रहा है। एबीवीपी ने मांग की कि वन ईयर पीजी कार्यक्रम की सीटों में तत्काल बढ़ोतरी की जाए और छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट एवं पारदर्शी प्रवेश नीति लागू की जाए।प्रदर्शन के दौरान एबीवीपी से जुड़े एक छात्र ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने पहले यह घोषणा की थी कि चौथे वर्ष (फोर्थ ईयर) की पढ़ाई पूरी करने वाले ऑनर्स और प्रोग्राम दोनों श्रेणी के छात्र मेरिट के आधार पर एक वर्षीय मास्टर्स कोर्स में प्रवेश ले सकेंगे। लेकिन, अब जब प्रवेश प्रक्रिया शुरू हुई है, तो इन छात्रों के लिए बेहद सीमित सीटें उपलब्ध कराई गई हैं। छात्रों का कहना था कि जहां दो वर्षीय मास्टर्स कोर्स में चार से पांच हजार सीटें उपलब्ध हैं, वहीं फोर्थ ईयर पूरा करने वाले छात्रों के लिए वन ईयर मास्टर्स में केवल लगभग एक हजार सीटें रखी गई हैं। एबीवीपी ने इसे छात्रों के साथ अन्याय बताते हुए आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने बिना पर्याप्त तैयारी के नई व्यवस्था लागू कर दी।
छात्र ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान भी विश्वविद्यालय प्रशासन का कोई अधिकारी छात्रों से बातचीत करने नहीं आया। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द संवाद नहीं किया तो वे कुलपति (वीसी) आवास तक अपना आंदोलन ले जाएंगे।
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ की पूर्व सचिव मित्रविंदा करवाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर लापरवाही और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भी एबीवीपी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत फोर्थ ईयर कार्यक्रम लागू कराने के लिए आंदोलन किया था, जिसके बाद विश्वविद्यालय ने इसे लागू किया। अब वन ईयर मास्टर्स कोर्स में पर्याप्त सीटें उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं, जिससे हजारों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रत्येक विभाग में केवल 35 से 40 सीटें उपलब्ध कराई हैं, जबकि फोर्थ ईयर पूरा करने वाले छात्रों की संख्या इससे कई गुना अधिक है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे में उन छात्रों का क्या होगा जिन्होंने विशेष रूप से एक वर्षीय मास्टर्स के उद्देश्य से चौथे वर्ष की पढ़ाई पूरी की।
मित्रविंदा करवाल ने यह भी आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों को समय रहते आवश्यक दिशा-निर्देश नहीं दिए। उन्होंने दावा किया कि प्रोग्राम कोर्स के छात्रों को यह जानकारी नहीं दी गई कि प्रायोरिटी-1 श्रेणी में प्रवेश के लिए रिसर्च कार्य अनिवार्य होगा। इस कारण कई छात्रों ने आवश्यक रिसर्च कार्य नहीं किया और अब उन्हें प्रवेश प्रक्रिया में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन की तैयारी और योजना की कमी का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
एबीवीपी दिल्ली के प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रहा है और बिना जमीनी वास्तविकता को समझे नीतियां बना रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य छात्रों को बेहतर अवसर देना था, लेकिन दिल्ली विश्वविद्यालय इसे प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रहा है। यदि विश्वविद्यालय ने फोर्थ ईयर कार्यक्रम लागू किया है तो उसके अनुरूप वन ईयर मास्टर्स में पर्याप्त सीटें भी उपलब्ध करानी चाहिए थीं। छात्रों को प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने के बाद यह बताया जा रहा है कि सीटें बेहद सीमित हैं, जो पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने मांग की कि वन ईयर एमए कार्यक्रम में सीटों की संख्या बढ़ाकर उचित अनुपात सुनिश्चित किया जाए।
सार्थक शर्मा ने आगे कहा कि एबीवीपी अपनी इस मांग को लेकर आर्ट्स फैकल्टी से लेकर कुलपति आवास तक संघर्ष करेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी छात्रों से बातचीत कर ठोस समाधान की घोषणा नहीं करता, तब तक आंदोलन लगातार जारी रहेगा।




